अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन के 32वें संस्करण में कुछ भी नया था तो यह कि इस बार धावक ऑनलाइन इंट्री करा सकते थे। पहली बार यह व्यवस्था लागू हुई और धावकों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई। सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले थे। इंदिरा मैराथन का स्तर लगातार गिरने के बाद भी धावकों की संख्या में अचानक इतना इजाफा हो जाने से कई सवाल उठने लगे हैं और चर्चा तो यहां तक है कि ऑनलाइन इंट्री की आड़ में कहीं खेल न हो गया हो ताकि अगली बार इसी संख्या के आधार पर अधिक बजट प्राप्त किया जा सके।
खेल विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इंदिरा मैराथन में इस बार धावकों की संख्या दोगुना हो गई है। पुरुष वर्ग में पिछले वर्ष जहां 245 धावकों ने हिस्सा लिया था, वहीं इस बार 534 धावकों ने इंट्री कराई। वहीं महिला वर्ग में धाविकाओं की संख्या पिछले वर्ष 24 थी जो इस वर्ष बढ़कर 71 पर पहुंच गई है। इसी तरह क्रास कंट्री में भी हिस्सा लेने वालों की संख्या में दोगुने से अधिक का इजाफा हुआ लेकिन इंदिरा मैराथन जब शुरू हुई तो रूट पर धावकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कम नजर आई।
क्रॉस कंट्री की भी यही स्थिति रही। अब सवाल उठ रहे हैं कि धावकों की संख्या दोगुने से अधिक हुई है तो मैराथन और क्रॉस कंट्री के दौरान धावक कहां गए। महिला वर्ग की क्रॉस कंट्री में 11 धाविकाओं ने इंट्री कराई थी लेकिन इक्का-दुक्का ही पहुंची। कोई दौड़ पूरी नहीं कर सका और खेल विभाग इस वर्ग का परिणाम ही घोषित नहीं कर सका। चर्चा है कि ऑनलाइन इंट्री की आड़ में बड़ी संख्या में फर्जी इंट्रियां कर दी गईं और इसी वजह से धावकों की संख्या में अचानक दोगुने से अधिक का इजाफा हो गया।