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इस जीवन में नहीं मिलेगी अब इतनी लंबी छुट्टी

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एनसीजेडसीसी की ओर से रविवार को आयोजित ई-कवि सम्मेलन में कोरोना संक्रमण से उत्पन्न हालात को कविताओं केजरिए बयां करने की कोशिश की गई। इस कवि सम्मेलन को एनसीजेडसीसी के फेसबुक पेज पर लाइव किया गया। कवि सम्मेलन की शुरूआत दिल्ली की कवियत्री डॉ सरिता शर्मा की सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद उन्होंने कई गीत भी पढ़े। फिर जबलपुर के हास्य कवि सुदीप भोला ने कोरोना पर आधारित कविता -इस जीवन में नहीं मिलेगी इतनी लंबी छुट्टी... सुनाया। उत्तराखंड के कवि नीरज नैथानी ने प्रकृति और पहाड़ों को समर्पित कविता से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। इनके बाद बिहार के मधुबनी के हास्य व्यंग्य रचनाकार शंभू शिखर ने- ‘मैं बिहारी हूं’ तथा कोरोना से बचने का संदेश देती कविता ‘रोज सुबह योगा कर लें और तब जाकर जलपान करें’- पढ़ा।
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अलीगढ़ से जुड़े गीतकार डॉ विष्णु सक्सेना ने पढ़ा कि -दिल की जमीं पर जब फसल यादों की बोओगे/ जिसको जितना प्यार करोगो, उतना ही रोओगो...। संचालन कर रहे प्रयागराज के युवा कवि श्लेष गौतम ने हिंदी के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया। पंक्तियां इस तरह थीं- आपस का प्रेम एकता की बात है/ हिंदी जाड़े की धूप गर्मियों की रात है...। कवि सम्मेलन में हरियाणा के मंजीत सिंह की हास्य व्यंग्य कविताओं पर खूब ठहाके लगे। इनके अलावा दिल्ली के दीपक गुप्ता, राजस्थान के कवि विनीत चौहान ने भी काव्यपाठ किया। इससे पहले केंद्र निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने कवियों का स्वागत किया। अध्यक्षता डॉ विष्णु सक्सेना ने की। धन्यवाद ज्ञापन केंद्र के कार्यक्रम अधिशाषी मधुकांक मिश्रा ने किया।
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