उमेश पाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी सामने आ रही है। वह 2022 के विस चुनाव में फाफामऊ विधान सभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सपा के कई नेताओं से पैरवी कराई। जोड़तोड़ कर वह सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव तक पहुंचे और पार्टी का दामन भी थाम लिया लेकिन, उन्हें टिकट नहीं मिल सका। अंतत: उमेश फिर भाजपा में आ गए थे।
विधानसभा चुनाव से करीब आठ महीने पहले तत्कालीन जिला उपाध्यक्ष राम सुमेर पाल के जरिये उमेश पाल सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय पर मिले थे। तब बाकायदा अखिलेश की मौजूदगी में उमेश को सपा की सदस्यता ग्रहण कराई गई थी।
अंदरखाने यहां तक कहा जा रहा है कि उमेश को सपा की सदस्यता दिलाने के लिए एक नेता ने पार्टी फंड में कुछ चंदा भी जमा कराया था। टिकट न मिलने पर उस सपा नेता से उमेश का विवाद भी होने की बात कही जा रही है। हालांकि जिलाध्यक्ष योगेश यादव ने इससे इन्कार किया है। उनका कहना है कि सपा में सदस्यता दिलाने के एवज में किसी से डोनेशन लिए जाने की परंपरा नहीं है।
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उमेश पाल ने 20 फरवरी 2021 को सपा की सदस्यता ग्रहण की थी। पार्टी के जिला उपाध्यक्ष राम सुमेर पाल ने इसकी पुष्टि की। राम सुमेर ने बताया कि उमेश उनके साथ ही लखनऊ गए थे। सपा की सदस्यता ग्रहण कराने के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनको मेहनत से काम करने की सलाह दी थी। उमेश फाफामऊ सीट से टिकट चाह रहे थे। लेकिन बाद में टिकट अंसार अहमद को मिल गया। टिकट न मिलने पर उमेश पाल दोबारा भाजपा में चले गए थे।