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Allahabad High Court : मुख्य सेविका के पदों पर भर्ती के मामले में यूपी सरकार से जवाब तलब

Sat, 15 Oct 2022 10:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने कहा है कि पहले से मुख्य सेविकाओं के पद पर कार्यरत मुख्य सेविकाओं के नियमित करने से कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा। इसकी भी जानकारी देनी होगी, क्योंकि विभाग के निदेशक ने 2018 में शासन को भेजे प्रस्ताव में यह कहा है कि नियमितीकरण करने से कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य सेविकाओं की पदों पर भर्ती के मामले में यूपी सरकार से छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि मामले में संयुक्त सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार के स्तर से नीचे रैंक वाले अधिकारी का जवाबी हलफनामा नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने मुख्य सेविकाओं की भर्ती से पड़ने वाले वित्तीय बोझ का भी विवरण मांगा है।

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कोर्ट ने कहा है कि पहले से मुख्य सेविकाओं के पद पर कार्यरत मुख्य सेविकाओं के नियमित करने से कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा। इसकी भी जानकारी देनी होगी, क्योंकि विभाग के निदेशक ने 2018 में शासन को भेजे प्रस्ताव में यह कहा है कि नियमितीकरण करने से कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तिथि तय की है।


यह आदेश न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा ने अनीता सिंह व 75 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले में याचियों का तर्क था कि वे 2003 से ही बतौर मुख्य सेविका काम कर रही हैं। 2018 में अपने नियमितीकरण के लिए उन्होंने निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार के समक्ष अभ्यावेदन किया था।

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निदेशक ने उस अभ्यावेदन को शासन के समक्ष भेज दिया था, लेकिन शासन ने इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। शासन ने मुख्य सेविकाओं के2693 पदों पर भर्ती केलिए आवेदन निकाला है। उसमें 126 पदों पर बतौर मुख्य सेविका काम कर रही याचियों के पद भी शामिल हैं।


याचियों ने इसे आधार बनाते हुए हाईकोर्ट से अपने नियमितीकरण की मांग की थी। अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि याचियों के अभ्यावेदन को शासन ने निरस्त कर दिया है। क्योंकि, वे नियमितीकरण नियम-2016 के मानदंडों को पूरा नहीं कर रहीं हैं। इस संबंध में याचियों को सूचित भी कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि याचियों की ओर से भर्ती प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी गई है। केवल अपने नियमितीकरण की मांग की गई है। 
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