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Prayagraj News: साहित्यनगरी में प्रलेस दो फाड़, पृथक संगठन के एलान से उठा तूफान

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देश के सबसे बड़े साहित्यिक आंदोलन के तौर पर विख्यात प्रगतिशील लेखक संघ दो धड़ों में बंट गया है। अब तक मंडल स्तर पर संगठन का दायित्व देख रहे असरार गांधी ने संगठन से पृथक होकर नई कार्यकारिणी का एलान कर दिया है। संगठन तोड़ने की शिकायत पर शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश महासचिव को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है। कुरीतियों, अन्याय व पिछड़ेपन के विरोध में साहित्यिक चेतना पैदा करने के लिए 1935 में प्रलेस का गठन किया गया था।
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असरार गांधी ने नई कार्यकारिणी का गठन कर शीर्ष नेतृत्व की पेशानी पर बल डाल दिया है। असरार गांधी जिस प्रलेस के अध्यक्ष बने हैं ,उसकी सचिव आरती चिराग ने संगठन के 90वें स्थापना दिवस पर एकल काव्य पाठ और परिचर्चा कराकर नई पारी की शुरुआत कर दी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. संतोष भदौरिया और एहतराम इस्लाम इस कमेटी के संरक्षक बनाए गए है। इस कमेटी की घोषणा के बाद साहित्यिक हलके में बवंडर मच गया है। मूल संगठन की सचिव संध्या नवोदिता ने इसे कुछ बाहरी टपोरियों की साजिश करार देते हुए इस घटनाक्रम पर तल्ख टिप्पणी की है। उनका कहना है कि कुछ अराजक लोगों का घर बैठकर प्रलेस बना लेना पूरी तरह अवैध है।
अलग कार्यकारिणी घोषित करने वाले लोग प्रलेस के सामान्य सदस्य भी नहीं हैं। ऐसे में यह कार्यकारिणी अस्तित्वहीन और सिर्फ ख्याली है। संध्या ने बताया कि प्रगतिशील लेखक संघ की प्रदेश और राष्ट्रीय कार्यकारिणी को इस घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही संगठन कमजोर करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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प्रगतिशील लेखक संघ इलाहाबाद की कार्यकारिणी के अध्यक्ष पद से असरार गांधी को हटाया जा चुका है। असरार पिछले डेढ़ वर्ष से प्रलेस की बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे थे। फिलहाल कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र राही हैं। उधर, असरार गांधी के नेतृत्व वाली प्रलेस की कार्यकारिणी की सचिव आरती चिराग ने भी पलटवार किया है। उनका कहना है कि संध्या नवोदिता अब इस शहर से बोरिया-बिस्तर समेट कर दिल्ली शिफ्ट हो चुकी हैं। ऐसे में प्रयागराज में प्रलेस की जिम्मेदारी संभालने की वह हकदार नहीं रह गई हैं।





असरार गांधी ने जो कृत्य किया है, वह कहीं से स्वीकार्य नहीं है। उनकी कमेटी को मान्यता नहीं दी जाएगी। प्रलेस के 90 वर्षों के इतिहास के पन्ने को इस तरह चौपट नहीं होने दिया जाएगा। प्रदेश महासचिव को मैंने इस प्रकरण की जांच करने के लिए कहा है। तथ्यपरक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। सुखदेव सिंह सिरसा, राष्ट्रीय महासचिव, प्रलेस।



मैं प्रलेस का अध्यक्ष था, हूं और रहूंगा: असरार

कथाकार असरार गांधी ने अमर उजाला से कहा कि मैं प्रलेस का अध्यक्ष था, हूं और रहूंगा। किसी के हटाने से मैं हट नहीं सकता। मैं सिर्फ दो महीने के लिए बीमार था। लौटकर आया तो राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश महासचिव से कई बार बात करने की कोशिश की, लेकिन मेरी नहीं सुनी गई। मैं कोई बाज दोने का पत्ता नहीं हूं कि जब चाहे फेंक दिया जाए। जरूरत पड़ी तो मैं इस कमेटी की रक्षा के लिए कोर्ट की शरण लूंगा। इसके लिए कानूनी सलाह ली जा रही है।



सचिवों ने एक दूसरे पर लगाया आरोप- प्रत्यारोप

प्रयागराज। प्रदेश के दोनों धड़े की सचिवों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। नए धड़े की सचिव आरती चिराग का कहना है कि सीडीए पेंशन में तैनात कवयित्री संध्या नवोदिता का तबादला दिल्ली हो गया है और अब वह वहीं शिफ्ट हो गई हैं। उनका सामान भी यहां से पैक होकर जा चुका। ऐसे में वह यहां प्रलेस सचिव का दायित्व कैसे संभाल सकती हैं। उधर, संध्या का कहना है कि मैं कुछ दिन के लिए ही दिल्ली आई हूं। मेरा सामान इलाहाबाद में मेरे घर में ही है और मैं वहां की मूल निवासिनी हूं। ऐसे में बाहरी लोगों की ओर से मुझे बाहरी बताना हास्यास्पद है।
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