जेल में बंद ऐसे कैदियों के लिए राहत वाली खबर है, जो छोटे-छोटे मामलों में भी जेल में लंबी सजा काट रहे हैं या फिर किसी न किसी वजह से अपनी जमानत नहीं करा पाते हैं। ऐसे कैदियों के लिए जल्दी ही भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)-1860 और अपराध प्रक्रिया संहिता-1973 में बदलाव होने जा रहा है। इसके लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह बातें 21वें विधि आयोग के चेयरमैन एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति बलवीर सिंह चौहान ने कहीं। वह यहां श्री राधा-कृष्ण वेद विद्यालय नई झूंसी एवं महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुए तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने आए हुए थे।
अमर उजाला के साथ खास बातचीत में विधि आयोग चेयरमैन ने कहा कि दोनों ही संहिताएं पुरानी और अंग्रेजों के जमाने से हैं। बदलते समय के साथ उसमें नई चीजों को जोड़ने और नए कानून समाहित किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। सबसे अधिक जरूरत ऐसे कैदियों के लिए भी संशोधन करने की जरूरत हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अभाव वश अपनी जमानत नहीं करा पाते हैं। जमानत के लिए अपील नहीं कर पाते हैं। ऐसे कैदियों को जल्दी और समय से जमानत या न्यय मिल जाए, इसको देखते हुए सीआरपीसी-1973 और आईपीसी-1860 में बदलाव का निर्णय लिया गया है। इसके लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। हालांकि इसमें अभी दो सदस्य हैं, तीन और सदस्यों को शामिल किया जाना है।
सदस्यों की नियुक्ति के बाद कमेटी आईपीसी और सीआरपीसी में उन कानूनों की गहरी छानबीन करेगी, जिसकी जरूरत नहीं है या फिर किन मामलों में नए कानून जोड़े जाने जरूरत है। मामलों में विधिक सहयोग मुहैया कराने सहित तमाम मुद्दों को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा और उसकी रिपोर्ट तैयार कराकर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।