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आनंद गिरी मामले में पीछे हटीं महिलाएं, बोलीं- आरोप लगाने को लालच देकर उकसाया

Thu, 23 May 2019 01:49 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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आनंद गिरी - फोटो : अमर उजाला
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महिलाओं से अमर्यादित आचरण के आरोप में आस्ट्रेलिया के सिडनी में गिरफ्तार, बाद में रिहा योगगुरु स्वामी आनंद गिरि की मुश्किलें और कम हो सकती हैं। मामले में आए नए मोड़ के मुताबिक उन पर उक्त आरोप लगाने वाली महिलाओं ने पूरी स्थिति जानने के बाद इस मामले से अपने को अलग कर लिया है। उनका कहना है कि उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ था। उक्त मामले में उन्हें जानबूझ कर फंसाया गया और आरोप से जुड़ी बातें कहलवाई गईं।
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स्वामी आनंद गिरि के शिष्य प्रदीप सेमवाल का कहना है कि पूरी बातें सामने आने के बाद स्वामी आनंद गिरि पर आरोप लगाने वाली महिलाएं अपराधबोध महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ था। दरअसल उन्हें पैसे और नौकरी का लालच देकर उक्त आरोप लगाने के लिए उकसाया गया। लेकिन पूरी बातें सामने आने के बाद अब उन्हें अपने किए पर पछतावा है।

शिष्य सेमवाल का दावा है कि आस्ट्रेलिया में स्वामी आनंद गिरि की प्रवासी भारतीयों के बीच बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्यावश ‘फिजी इंडियंस’ की ओर से जानबूझकर ऐेसी साजिश रची गई। ताकि वह न ही आस्ट्रेलिया आने पाएं और न ही कथा-प्रवचन करने पाएं। दरअसल इस बीच स्वामी आनंद गिरि ने सिडनी में संस्था बनाकर प्रवासी भारतीयों के बीच काम करना शुरू किया है, जिससे अन्य लोगों ने उन्हें यहां आने से रोकने के लिए जाल रचा। बता दें, सिडनी में योग एवं प्रवचन के बाद उनकी भारत वापसी की तैयारी थी, लेकिन वापसी से ठीक पहले यह प्रकरण हो गया।
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उन्होंने जोड़ा कि दस मई को सुनवाई के दौरान स्वामी आनंद गिरि के वकील की ओर से मामले के तहत अदालत में बहस के दौरान उनका पक्ष रखा गया था जबकि आरोप लगाने वाली महिलाओं की ओर से कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका था। इसी आधार पर अदालत ने जमानत मंजूर कर ली थी और उनकी रिहाई हो गई थी। अब 26 जून को अगली सुनवाई में अदालत के आदेश की प्रतीक्षा है लेकिन आरोप लगाने वाली महिलाओं की ओर से मामले से अपने को अलग करने के बाद उम्मीद है कि अदालत स्वामी आनंद गिरि को बेदाग बरी कर दे।

स्वामी आनंद गिरि अपने शिष्यों के पास ही हैं। निर्धारित 26 जून से पहले उनकी न कोई पेशी है और न ही आस्ट्रेलिया में उनके कहीं भी आने-जाने पर कोई रोक है लेकिन भारत वापसी का फैसला अदालत के अंतिम आदेश के बाद ही हो सकेगा। इस बीच उन्होंने अपने को किसी सार्वजनिक कार्यक्रम, सभा, व्याख्यान, प्रवचन आदि से दूर ही रखा है।
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