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बारिश में बंट रहे सूखा राहत पैकेट

Tue, 19 Jul 2016 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सुनने में अटपटा लगेगा पर बारिश के मौसम में प्रशासन सूखा राहत पैकेट बांट रहा है और वह भी साल भर बाद। सूखा राहत पैकेट के वितरण में जमकर मनमानी भी की गई। केवल सिफारिश वालों को ही पैकेट मिल सके और बाकी को छोड़ दिया गया। कई ऐसे गांव हैं, जो सूखा से ज्यादा प्रभावित थे, लेकिन वितरण के दौरान उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अफसरों का दावा है कि पैकेट का वितरण तहसील स्तर पर कराए गए सर्वे के आधार पर किया गया। बाकी पैकेट्स के वितरण के लिए डिमांड शासन को भेजी गई है। रकम मिलने पर वितरण कराया जाएगा।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की थी कि यमुनापार को बुंदेलखंड की तर्ज पर सूखा राहत पैकेज दिया जाएगा। इसके तहत सभी अंत्योदय कार्डधारकों को राहत पैकेट वितरण दिया जाना है। राहत पैकेट में 10 किलो आटा, 10 चावल, एक किलो चीनी, पांच लीटर सरसों का तेल, पांच किलो चना की दाल, 25 किलो आलू, एक किलो शुद्ध देशी घी, बच्चों के लिए प्रति परिवार एक किलो मिल्क पाउडर, एक किलो नमक और 200 ग्राम हल्दी शामिल है। 

पैकेट का वितरण कोटेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है। यमुनापार में 41 हजार 358 अंत्योदय कार्डधारक हैं। सर्वे के दौरान इनमें से 29 हजार 57 कार्डधारकों को राहत पैकेट देने के लिए चिह्नित किया गया। पहली किस्त के रूप में एक करोड़ रुपये ही मिले, जिससे महज 3736 पैकेट ही तैयार हुए। सूखा प्रभावित सभी गांवों को बराबर से लाभ मिल सके, सो इसके लिए गांवों में समान रूप से पैकेट का वितरण कराया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यमुनापार की मेजा, कोरांव, करछना और बारा तहसील में किसी गांव में 100 फीसदी पैकेट का वितरण करा दिया गया तो कहीं पैकेट बिल्कुल नहीं बंटे। सूत्रों का कहना है कि जिन गांवों के लिए सत्ता पक्ष के लोगों ने सिफारिश की या प्रधानों अथवा दूसरे जनप्रतिनिधियों ने अफसरों पर दबाव बना लिया, वहां पैकेट का वितरण पहले करा दिया गया। करछना के खाईं, भुंडा, बसही जैसे गांवों और मेजा के औता, कठौली जैसे गांवों में 100 फीसदी वितरण कराया गया। 
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वहीं कचरी, कचरा, देहली भगेसर जैसे गांवों में पॉवर प्लांट के लिए जमीन देने वाले किसानों को राहत पैकेट नहीं मिले, जबकि इन गांवों में भी बड़ी संख्या में सूखा प्रभावित किसान हैं और वे अंत्योदय कार्ड धारक भी हैं। इसके अलावा भी सैकड़ों गांव हैं, जहां राहत पैकेट नहीं बांटे गए। एडीएम वित्त एवं राजस्व राम सहाय यादव का कहना है कि पैकेट का वितरण तहसील स्तर पर हुए सर्वे के आधार पर किया गया। आठ दिन पहले शासन को फिर से डिमांड भेजी गई है। रकम जारी होते ही बाकी चयनितों को भी पैकेट का वितरण कर दिया जाएगा।

कोटेदारों ने भी किया खेल
राहत पैकेट का वितरण कोटेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि कई गांवों में कोटेदारों ने राहत पैकेट से सामग्री निकाल ली। कहीं, आलू निकाल लिया तो कहीं दाल नहीं दी। कोटेदारों ने राहत पैकेट में घपला का मोटी कमाई की। सूत्रों के मुताबिक बहुत से कोटेदारों ने राहत पैकेट प्राप्त करने के लिए अफसरों को मोटा कमीशन भी खिलाया।
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