करीब ढाई महीने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ को खुली अदालत में सुनवाई के लिए सोमवार से खोला जा रहा है। हालांकि, कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
आशंका है कि कोर्ट खुलने पर उत्साह में बड़ी संख्या में वकील पहुंच सकते हैं। मुकदमों की सुनवाई को लेकर गाइडलाइन पहले ही जारी कर दी गई है। समिति संख्या में स्पेशल बेंच मुकदमों की सुनवाई करेगी। इनमें उन्हीं वकीलों को जाने की अनुमति होगी, जिनका केस लगा है।
मुकदमा बहस करके तत्काल कोर्टरूम से बाहर आना होगा। एक समय में छह से अधिक वकील न्यायकक्ष में नहीं रह सकेंगे। जजों को भी सीमित संख्या में स्टाफ अपने साथ रखना होगा। हाईकोर्ट के सेक्शन भी गाइडलाइन के मुताबिक ही खुलेंगे।
वकीलों और स्टाफ के कोर्ट परिसर में प्रवेश से पहले थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। सैनिटाइजेशन की भी पूरी व्यवस्था की गई है। पूरे हाईकोर्ट परिसर को सैनिटाइज किया गया है। गेट पर सीएमओ की मेडिकल टीम मौजूद रहेगी।
मुकदमे के दाखिले के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था पूरी तरह से टूट रही है। इसे देखते हुए एल्डर कमेटी के सदस्यों चेयरमैन वीसी मिश्र, एनसी राजवंशी और पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा, निर्वाचित अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह , महासचिव प्रभाशंकर मिश्र आदि ने वकीलों से अपील की है कि बिना काम के हाईकोर्ट न आएं। रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल आशीष श्रीवास्तव ने भी वकीलों से सहयोग मांगा है।