खुद के जज्बे और हुनर से स्टार्ट अप को परिभाषित करने वाले युवा उद्यमियों ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में छात्र-छात्राओं के साथ अनुभव साझा किए। संस्थान के ही पुराछात्रों ने कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये वार्षिक टर्नओवर की कंपनी खड़ी कर ली है। ऐसे ही एक पुराछात्र ज्योति प्रसाद भट्ट ने महज चार साल में 13 करोड़ की कंपनी खड़ी करने के साथ 54 युवाओं को नौकरी भी दी है।
संस्थान में आयोजित उद्यमिता कार्यक्रम में आए ज्योति ने बताया कि सन 2000 में बीटेक करने के बाद नौकरी शुरू की। अलग-अलग कंपनियों में नौकरी करते हुए अमेरिका, लंदन समेत कई देशाें में गए, लेकिन चार साल पहले वापस लौटकर सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की सेवा देने वाली कंपनी खोल ली। मात्र दो लोगों और दो लाख रुपये से शुरू कंपनी के पास 25 बड़ी संस्थाओं के सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का काम है। इनमें पांच कंपनियां फॉच्यून 500 में शामिल हैं। 2014 में स्टार्ट अप आफ द ईयर भी चुना गया था।
संस्थान के छात्र पवन कुशवाहा ने भी सॉफ्टवेयर कंपनी खोली है। पवन को सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी में विशेषज्ञता हासिल है। पवन के पास कंपनी खोलने के लिए नोएडा में स्थान का संकट था। ऐसे में ज्योति ने साथ दिया। अब पवन की भी टीम बन गई है। ज्योति ने बताया कि शुरू मेें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इनसे संभलने के लिए छोटी-छोटी मदद की जरूरत होती है। इसमें स्थान की समस्या सबसे अहम है। उद्यमिता कार्यक्रम में दूसरे दिन शनिवार को कई अन्य युवाओं ने भी अनुभव साक्षा किए।
एमएनएनआईटी में जुटे युवा उद्यमियों ने केंद्र सरकार की स्टार्ट-अप योजना को उम्मीदों वाला बताया, लेकिन उसमें कुछ खामियां भी गिनाईं। ज्योति भट्ट का कहना है कि तीन साल तक टैक्स में छूट के बजाय स्टार्ट अप के लिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने की पहल होनी चाहिए थी। स्थान, बिजली का बिल, इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं सस्ते दर पर मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि कम पूंजी के स्टार्ट अप करने वाले युवा के पास छोटी-छोटी समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है। ज्योति ने इसके लिए स्टार्ट-अप पार्क की वकालत की।