जिला न्यायालय ने दो बम की बरामदगी के आरोप में 27 वर्षों से चल रहे मुकदमें में पुलिस के एक भी गवाह को अभियोजन द्वारा पेश न किए जाने पर साक्ष्य का अवसर समाप्त करते हुए आरोपी शेर सिंह को दोषमुक्त कर दिया है। इस मामले में कोर्ट ने गवाह पेश करने के लिए एसएसपी,डीआईजी,आईजी और डीजीपी तक को गवाह पेश किए जाने का आदेश दिया था लेकिन गवाह पेश नहीं किए जा सके जबकि सभी गवाह पुलिस के ही थे। यह आदेश एडीजे मार्कण्डेय राय ने दिया है।
अभियोजन के अनुसार मामला जार्जटाऊन थाने का है। पुलिस उपनिरीक्षक अजय कुमार चतुर्वेदी ने 11 जनवरी 1989 की रात अलोपीबाग क्षेत्र से आरोपी शेर सिंह के पास से दो अदद बम की बरामदगी दिखाकर मुकदमा कायम कराया था। 2013 से मामला गवाही के लिए चल रहा है। कोर्ट ने साक्ष्य पेश किए जाने के लिए एसएसपी से लेकर पुलिस के उच्य अधिकारियों तक को पत्र लिखा और साक्ष्य के कई अवसर दिए लेकिन अभियोजन ने एक भी गवाह पेश नहीं किया, न ही अभिलेखों को साबित करने के लिए पुलिस का कोई गवाह उपस्थित ही हुआ । कोर्ट के सामने साक्ष्य का अवसर समाप्त करने और आरोपी को दोषमुक्त कर देने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया।
एक अन्य मुकदमा सरकार बनाम देव शर्मा में भी जीआरपी ने गवाह पेश नहीं किया जिससे आरोपी को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। इस प्रकरण में एसएसआई वीपी सिंह ने 18 अक्टूबर 2004 को रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म से देव शर्मा के पास से अवैध डायजापाम की दस गोलियां और पाउडर की बरामदी दिखा कर एनडीपीएस के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमा गवाही के लिए 2008 से चल रहा है। कोर्ट ने एसपी जीआरपी और आईजी जीआरपी से पुलिस के गवाह पेश कराने के लिए कई पत्र लिखा लेकिन एक भी गवाह उपस्थित नहीं हुआ जिससे कोर्ट ने साक्ष्य का अवसर समाप्त कर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है।