बार काउंसिल ऑफ इंडिया अधिनियम आने के बाद बदला वकील एसोसिएशन का नाम
वर्ष 1926 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया का अधिनियम पारित होने के बाद 1928 में वकील एसोसिएशन का नाम बदलकर एडवोकेट एसोसिएशन कर दिया गया ।
बार लाइब्रेरी और एडवोकेट एसोसिएशन के अलावा एक और संगठन था, जिसका नाम इंडियन बैरिस्टर था। इसमें वह लोग होते थे, जिनका सदस्यता प्रार्थनापत्र बार लाइब्रेरी की ओर से निरस्त कर दिया जाता था ।
जब निहाल चंद का सदस्यता प्रार्थनापत्र बार लाइब्रेरी की ओर से निरस्त कर दिया गया, तब उन्होंने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर एक संगठन बनाया। इसको 1933 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की ओर से मान्यता प्रदान की गई। तब से इसे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नाम से जाना जाने लगा । इसमें एडवोकेट्स ओर बैरिस्टर्स दोनों शामिल थे । जब 1947 में बी.मालिक मुख्य न्यायाधीश बने तो उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए एक बिल्डिंग निर्माण की मंजूरी दी, जिसमे वर्तमान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन स्थित है परंतु उनके कार्यकाल में यह बिल्डिंग पूरी नहीं हो सकी।
अधिवक्ता संंघों को मिलकर बना इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन
अधिवक्ताओं के लिए बिल्डिंग का निर्माण मुख्य न्यायाधीश ओएच.मुथ्यु के कार्यकाल में पूरा हुआ। इस दौरान उन्होंने एक सुझाव दिया क्यों न हाईकोर्ट के सभी अधिवक्ताओं का एक सम्मिलित संगठन बनाया जाए। 19 सितंबर 1957 को तत्कालीन महाधिवक्ता के.एल.मिश्रा ने तीनों संगठन बार लाइब्रेरी, एडवोकेट एसोसिएशन तथा बार एसोसिएशन को पत्र लिख कर मुख्य न्यायधीश के सुझाव के बारे सूचित किया कि तीनों संगठनों को सम्मिलित कर एक संगठन बनाया जाए।
इसी परिप्रेक्ष्य में तीनों संगठनों ने 18 और 28 नवंबर 1957 को संयुक्त सभा में प्रस्ताव पारित किया। इन तीनों संगठनों को संयुक्त कर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन नाम दिया गया। तबसे यही नाम प्रचलित है। अध्यक्ष राधाकांत ओझा कहते हैं, यह संगठन आज विशाल रूप ले चुका है। फिलहाल इसके 31 हजार सदस्य बन चुके हैं।