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इलाहाबाद विश्वविद्यालय नहीं खर्च कर सका तीन अरब रुपये, शिक्षा मंत्रालय ने किया जवाब तलब

Wed, 19 Aug 2020 03:18 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) - फोटो : अमर उजाला
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रेकरिंग ग्रांट के रूप में पिछले तीन साल में मिले तीन अरब आठ करोड़ 28 लाख 73 हजार रुपये की राशि को इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) खर्च नहीं कर सका। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय को भी यह नहीं बताया गया कि धनराशि क्यों खर्च नहीं की गई। 

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मंत्रालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए इविवि से जवाब तलब किया है। साथ ही अन्य प्रोजेक्ट्स के तहत खर्च हुए करोड़ों रुपये का उपभोग प्रमाणपत्र भी मांगा है।

इविवि को शिक्षा मंत्रालय से रेकरिंग ग्रांट के रूप में वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में क्रमश: 71 करोड़ 86 लाख 79 हजार रुपये, 95 करोड़ 33 लाख 76 हजार रुपये और एक अरब 41 करोड़ आठ लाख 18 हजार रुपये मिले थे।
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इविवि प्रशासन ने रेकरिंग ग्रांट की धनराशि खर्च नहीं की, लेकिन मंत्रालय को यह नहीं बताया कि किन कारणों से अरबों रुपये खर्च नहीं किए जा सके। शिक्षा मंत्रालय ने इसे लापरवाही मानते हुए इविवि प्रशासन से पूछा है कि मामले में कारण सहित जवाब लिखकर भेजें कि रेकरिंग ग्रांट की रकम खर्च क्यों नहीं की जा सकी।

इसके अलावा इन तीन वर्षों में अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए इविवि को मंत्रालय ने 35 करोड़ 22 लाख 95 हजार रुपये जारी किए। वर्ष 2017-18 में 20 करोड़ 22 लाख 95 हजार, वर्ष 2018-19 में सात करोड़ और वर्ष 2019-20 में आठ करोड़ रुपये दिए गए। 

इविवि प्रशासन ने इस खर्च का विवरण भी मंत्रालय को उपलब्ध नहीं कराया है। मंत्रालय ने उपभोग प्रमाणपत्र तलब कर लिया है और यह भी पूछा है कि जिस कार्य के लिए रकम दी गई, उसकी स्थिति क्या है। वहीं, मंत्रालय ने इन तीन वर्षोँ में आटउसोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों का विवरण भी तलब किया है।

स्थायी वीसी आने के बाद ही कोई नया काम
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर कोई नया काम शुरू करना है तो इविवि प्रशासन उसकी डिटेल तैयार कर ले। इसकी एक कॉपी अपने पास रखे और एक कॉपी मंत्रालय को प्रेषित की जाए। 

स्थायी कुलपति की नियुक्ति के बाद नए कार्यों को शुरू कराया जाए। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि अगले कुछ महीनों में जो निर्माण कार्य पूरे होने वाले हैं, उन्हें समय से निपटा लिया जाए। विलंब होने के कारण इस पर किसी तरह का अतिरिक्त खर्च नहीं होना चाहिए।

वहीं इविवि के पीआरओ डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र का कहना है कि मंत्रालय की ओर से यह पत्र रुटीन में जारी किया जाता है। मंत्रालय ने जो भी जानकारी मांगी थी, उसका जवाब भेज दिया गया है।

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