सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु होने पर याची की आश्रित कोटे से मेट के पद पर नियुक्ति हो गई। जिसके बाद याची ने पिता के सेवानिवृति लाभों सहित ग्रेच्युटी की पूरी धनराशि प्रदान करने का प्रार्थना पत्र दिया था। विभाग ने सेवानिवृति लाभ से न्यूनतम वेतन स्कीम के तहत दो लाख छह हजार छह सौ छप्पन रुपये विभाग द्वारा पिता को दिए गए रूपए की वसूली करते हुए शेष धनराशि प्रदान करने का आदेश पारित किया था। विभाग द्वारा पारित वसूली आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि आश्रित से मृतक कर्मचारी के किसी भी बकाए की वसूली नहीं की जा सकती। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग द्वारा पारित वसूली आदेश को रद्द करते हुए मृतक कर्मचारी की समस्त सेवानिवृति लाभों सहित ग्रेच्युटी की पूरी धनराशि का भुगतान तीस दिन में याची को करने का आदेश दिया है।