निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार
याची की ओर से कहा गया कि वह महिला है और दुष्कर्म नहीं कर सकती है। उसे फर्जी फंसाया गया है। मामले में याची का नाम पीड़ित के सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के बयान के तहत आया था। निचली अदालत ने उसे ट्रायल का सामना करने का आदेश दिया। याची ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने विचार करते हुए कहा कि अगर कोई महिला सामूहिक रूप से दुष्कर्म में शामिल है तो उसके खिलाफ भी मुकदमा चल सकता है और उसे दंड दिया जा सकता है।