21वीं रमजान को तीसरा असरा शुरू होने के साथ ही हजरत मौला अली की शहादत का दिन होने की वजह से हर किसी मुसलमान के लिए यह रोजा खास रहा। कोरोना संक्रमण में यह पहला मौका था जब हजरत अली की शहादत पर शहर गमजदा तो रहा, लेकिन न तो ताबूत अलम या जुलनाह निकाले गए और न ही सड़कों पर नौहा और मातम की सदाएं गूंजी।घरों में ही महिलाओं ने काले लिवास में मातमपुरसी की।
मौला अली की शहादत पर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में लॉकडाउन का पूरी तरह पालन किया गया। मातमी जुलूस कहीं नहीं निकाले गए। ताबूत नहीं सजे। मस्जिद काजी साहब बख्शी बाजार से फजिर की नमाज के बाद सभी लाइटों को बुझा कर मोमबत्ती की रोशनी में निकलने वाला सैकड़ों वर्ष पुराना जुलूस भी नहीं निकाला गया। मस्जिद के मुतवल्ली शाहरुख काजी ने मस्जिद में ताला लगा रखा था। मौलाना रजी हैदर ने कौम के लोगों को संदेश दिया था कि सरकार के आदेशों का पालन सख्ती से किया जाए। फजिर की नमाज के बाद मौलाना रजी हैदर ने अपने घर से ऑनलाइन शहादत की मजलिस पढ़ते हुए गमगीन मसाएब पढ़े।
जिसे शोशल मीडिया के माध्यम प्रसारित किया गया। पहले इस दिन मजलिस के दौरान हजारों की संख्या में अली के शैदाई मस्जिद में जमा रहते थे। मस्जिद के बाहर शहर व देहात से बड़ी संख्या में महीलाए काले लिबास और स्याह चादर में मौजूद रहकर हजरत अली की शहादत पर मातमपुरसी करती थीं, लेकिन मस्जिदें और इमामबाड़े वीरान रहे। वहीं रानी मंडी इमामबाड़ा आजम हुसैन से अंजुमन अब्बासिया की कयादत में व आबिदया इमामबाड़े से मिर्जा काजिम अली की सरपरस्ती में हजरत अली की शहादत पर निकलने वाला दो बड़ा जुलूस जो बच्चा धर्मशाला, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होकर चकिया कर्बला तक जाता था, वह भी नहीं निकाला गया। जुलूस न निकलने से लोगों में मायूसी थी। मातमी कार्यक्रम या तो ऑनलाइन आयोजित किए गए, या फिर घरों के अंदर महदूद रहकर गम का इजहार किया गया। शिया मुसलमानों ने काले लिबास पहन कर शोक मनाया।दरियाबाद इमामबाड़ा मोजिजनुमा में ताबूत सजा कर रखा गया। कुछ लोग आकर जियारत कर आंसू बहा कर मौला का गम मनाते रहे।
हजरत अली की शहादत पर ऑनलाइन मजलिसें
हजरत अली की शहादत पर शुक्रवार को शायर नजीब इलाहाबादी की निजामत में ऑनलाइन मजलिस हुई।मौलाना रजा हसनैन ने लॉकडाउन की वजह से सोशल मीडिया के माध्यम से मौला-ए- कायनात की शहादत पर तफसीली मसायब पढ़े। इमामबाड़े पर तीन दिवसीय शहादत की मजलिस ऑनलाइन आयोजित हुई ।वन वन जीरो फाउंडेशन की जानिब से शहीदे कुफा का मातम ऑनलाइन आयोजित किया गया। इसमें नौहा ख्वान मीर हसन मीर, शदीद बलतिस्तानी, मुसय्यब रिजवी समेत कई मशहूर नौहा ख्वानों ने ऑनर्लान नौहा पढ़ा। मौलाना युनूस हैदर माहुली की तकरीर और नाजिम लखनवी ने पेशख्वानी के जरिए खिराजे अकीदत पेश की। दायरा शाह अजमल स्थित सैयद हसन अस्करी के अजाखाने पर पांच लोगों की मौजूदगी में अंजुमन गुंचा -ए -कासमिया के नौहाख्वान शबीह अब्बास जाफरी ने मौजूदा हालात पर शरर नकवी का लिखा नौहा पढ़ा। इस मौके पर सैयद मोहम्मद अस्करी, रागिब हसन राहिल, इब्ने हसन वसफी, हसन आमिर रिजवी, सामिन अब्बास, सय्यादैन नकवी ने या अली मौला हैदर मौला की सदाएं बुलंद करते हुए मौलाए कायनात हजरत अली इब्ने अबुतालिब की शाहदत पर मातम करते हुए पुरसी की।