नगर निगम ने अवैध कब्जेदारों पर सख्ती करने का मन बना लिया है। ऐसे में दुकानों व फ्लैटों पर वर्षों से काबिज कब्जेदारों कार्रवाई होगी। इन संपत्तियों का नए सिरे से आवंटन किया जाएगा। इस पहल से निगम को प्रतिमाह दो से ढाई करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।
संपत्तियों के आवंटन को लेकर कई शिकायतें सामने आईं। इनमें दुकानों का स्वरूप बदलना, दूसरे को कब्जा देना या बिना वैध अनुमति उपयोग करना शामिल है। अब सभी संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। वास्तविक स्थिति का सत्यापन भी होगा। अवैध कब्जा पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। उनसे निर्धारित किराये का 150 फीसदी वसूला जाएगा। इसके बाद खाली होने वाली संपत्तियों का नए सिरे से पारदर्शी तरीके से आवंटन किया जाएगा। इस व्यवस्था को तत्काल लागू किया गया।
निगम की आय में वृद्धि और पारदर्शिता
इस कवायद का उद्देश्य निगम की संपत्तियों को कब्जा मुक्त करना है। इससे उनका पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही निगम की आय भी बढ़ेगी। महापौर ने बताया कि सिविल लाइंस, नैनी, झूंसी, खुल्दाबाद, फाफामऊ, मुंडेरा सहित प्रमुख स्थानों पर 600 से अधिक दुकानें हैं। ये दुकानें पहले 1000 से 1200 रुपये पर किराये पर थीं। अब इन्हें 4000 से 5000 रुपये प्रतिमाह पर देने का विचार है। अपर नगर आयुक्त अरविंद राय ने सदन में इस प्रस्ताव को सामने रखा। इनमें पगड़ी व्यवस्था को लागू करने की बात शामिल थी। मगर पार्षदाें ने इसका विरोध किया। पार्षद राजीव शुक्ला ने कहा कि ब्याज लेना सही है, मगर पगड़ी व्यवस्था को लागू करना उचित नहीं है।
अवैध कब्जों पर कार्रवाई और नए आवंटन
निगम प्रशासन पहले दुकानों, फ्लैटों और मकानों की सूची तैयार करेगा। इसके बाद अभिलेखों से मिलान कर वैध और अवैध कब्जों को चिह्नित किया जाएगा। नियमों के विपरीत कब्जा पाए जाने पर 150 फीसदी किराया वसूला जाएगा। रिक्त होने वाली संपत्तियों का नियमानुसार नए सिरे से आवंटन किया जाएगा।