भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में चल रहे सातवें विज्ञान समागम के चौथे दिन बृहस्पतिवार को वैज्ञानिकों ने भारत में शोध को बढ़ावा देने के लिए नई संभावनाओं वाले क्षेत्र खोजने पर बल दिया। विज्ञान समागम में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि प्रो. जेसी बोस के शोध के शताब्दी बाद भी उस स्तर का कोई शोध नहीं हो सका है।
विज्ञान समागम में आए नोबेल वैज्ञानिक प्रो. राबर्ट कर्ल ने अपने देश में विज्ञान के क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयासों की जानकारी देने के साथ बताया कि अमेरिका में विवि में पेटेंट्स को स्थानांतरित करने की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि भारत में भी इस दिशा में जिज्ञासा बढ़ाने की आवश्यकता है। ट्यूरिंग एवार्डी प्रो. जोसेफ सिफाकिस ने छात्रों एवं शोधार्थियों से पर्यावरण के क्षेत्र काम करने पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया किया शोध गतिविधियों का नियंत्रण वैज्ञानिकों के हाथ में होना चाहिए। उनका कहना था कि आज नौकरशाहों को विज्ञान से जुड़ी संस्थाओं का नियंत्रण सौंप दिया गया है जो अन्वेषण की प्रक्रिया को हानि पहुंचा रहे हैं। उन्होंने उद्योग घरानों से भी विज्ञान के क्षेत्र में होने वाले शोध में मदद के लिए आगे आने को कहा।
जाने माने खगोल विज्ञानी डॉ. जयंत नार्लिकर ने शोध को बढ़ावा देने केलिए विश्वविद्यालयों में आपस में समन्वय स्थापित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके अंतरविश्वविद्यालयीय केन्द्र बनाए जाएं। पुक्यांग राष्ट्रीय विवि के वैज्ञानिक डॉ. मान-गॉन पर्क ने कोरिया में विज्ञान के क्षेत्र में किए गए काम का उल्लेख किया। डॉ. लीना नीलसन ने नवाचार को विकसित करने की बात कही। ओहियो विवि प्रो. अनीस अरोरा ने कहा कि असफलताओं से परेशान होकर शोध के क्षेत्र से विमुख नहीं होना चाहिए। डीपी अग्रवाल ने कहा कि अच्छे परिणाम के लिए जोखिम लेना चाहिए। डॉ. एचसी जोशी ने कहा कि जुगाड़ आर्थिक रूप से उत्तम नहीं होता वह केवल विशिष्ट अवस्था में लाभदायक होता है। बातचीत के दौरान प्रो. एम राधाकृष्णन, निदेशक सोमनाथ विश्वास ने छात्रों से गणित के मूल्यों की ओर से छात्रों को जुड़ने की बात कही। अध्यक्षता प्रो. जयंत भट्टाचार्य ने की। उधर, सांस्कृतिक संध्या में रवींद्र नाथ टैगोर के चंडालिका नाटक का मंचन किया गया।