इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि थाना प्रभारी को डीजीपी की ओर से जारी सर्कुलर की जानकारी न होना बहाना नहीं, आदेश का उल्लंघन है। सर्कुलर के अनुसार गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि थाना प्रभारी को डीजीपी की ओर से जारी सर्कुलर की जानकारी न होना बहाना नहीं, आदेश का उल्लंघन है। सर्कुलर के अनुसार गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने याचियों की गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
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मैनपुरी निवासी आरोपी अनूप कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपियों को गिरफ्तार करते वक्त कारणों की जानकारी नहीं दी गई, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय मिहिर राजेश बनाम महाराष्ट्र राज्य और इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले उमंग रस्तोगी बनाम राज्य सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में पुलिस महानिदेशक की ओर से 25 जुलाई 2025 को गिरफ्तारी मेमो को लेकर नया सर्कुलर जारी किया गया है, जिसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया है पर उसका पालन नहीं किया गया।
राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि संबंधित पुलिस अधिकारी को डीजीपी के सर्कुलर की जानकारी नहीं थी, जिससे गलती हो गई। कोर्ट ने कहा कि कानून की जानकारी न होना कोई वैध बहाना नहीं हो सकता। कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए मैनपुरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 20 जनवरी 2026 को पारित रिमांड आदेश को निरस्त कर दिया। कहा, याचियों को तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता रहेगी।