इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के पास अलग रहने के पर्याप्त कारण हैं तो वह गुजारा-भत्ता की हकदार है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने परिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली मनोज यादव की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के पास अलग रहने के पर्याप्त कारण हैं तो वह गुजारा-भत्ता की हकदार है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने परिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली मनोज यादव की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
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ललितपुर निवासी मनोज का कहना था कि पत्नी 2005 से बिना किसी कारण के उससे अलग रह रही है। उसने वैवाहिक दायित्वों का पालन नहीं किया। यह क्रूरता की श्रेणी में आता है। साथ ही पत्नी एक वकील है और उसकी मासिक आय 30 हजार रुपये है। इसलिए उसे गुजारा-भत्ता नहीं दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पति और पत्नी के बीच लंबे समय से मुकदमेबाजी चल रही है, जिसमें दहेज उत्पीड़न का मामला भी शामिल है।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि 2010 में ही यह निर्धारित हो गया था कि पत्नी के पास अलग रहने के ठोस कारण हैं। इसके अतिरिक्त पति ने 2016 में भरण-पोषण की राशि 3,000 रुपये से बढ़ाकर 8,000 रुपये करने के आदेश को समय रहते चुनौती नहीं दी थी।