इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले में दो दोषियों की पांच साल की सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगा दी है। कहा कि अपील पर जल्द सुनवाई की संभावना नहीं है। आरोपियों ने सजा का काफी हिस्सा जेल में काट लिया है। इसलिए शेष सजा स्थगित की जाती है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज बजाज की एकल पीठ ने हरीश चंद्र सिंह और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
आरोपी हरीश चंद्र सिंह और अमरीश सिंह सैथवार के खिलाफ संतकबीर नगर के बखीरा थाने में गैर-इरादतन हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। जिला न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपियों को दोषी मानते हुए पांच-पांच साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। याची के अधिवक्ता प्रदीप पांडे ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया है। अभियोजन पक्ष की कहानी में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां हैं। हरीश चंद्र सिंह एक साल तीन माह और अमरीश सिंह दो साल से अधिक समय से जेल में हैं।
शासकीय अधिवक्ता ने दलील की अभियोजन ने दोषियों के अपराध को सिद्ध करने के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों ने ट्रायल के दौरान जमानत की शर्तों का दुरुपयोग नहीं किया और अपील की जल्द सुनवाई संभव नहीं दिखती। ऐसे में यदि सजा स्थगित नहीं की गई तो अपील निरर्थक हो सकती है। कोर्ट ने शेष सजा को निलंबित करते हुए दोनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संतकबीर नगर की संतुष्टि के अनुसार निजी मुचलका और जमानतदार देने पर रिहाई का आदेश दिया।