विक्रम और ऑटो चालकों की मनमानी से शहरी आजिज हैं। इन गाड़ियों को सड़कों पर बेतरतीब दौड़ाने और कहीं भी रोक कर सवारी बिठाने, उतारने के कारण आम वाहन चालक परेशान हैं। खतरनाक रूप से प्रदूषण फैला रहे इन विक्रम, ऑटो को शहर से बाहर करने की मांग भी हो रही है। शहर में इसके लिए विकल्प के रूप में ई-रिक्शा भी है, लेकिन प्रदूषण, दुर्घटना का कारण बन रहे इन सवारी वाहनों को शहर के बाहर करने पर विचार नहीं हो रहा है।
विक्रम, ऑटो चालकों की मनमानी इस कदर है कि इलाहाबाद जंक्शन, जॉनसेनगंज, नूरुल्ला रोड, राजरूपपुर, सिविल लाइंस, हाईकोर्ट पानी टंकी, कचहरी, तेलियरगंज, दारागंज, अलोपीबाग जैसे हिस्सों में उन्हीं की सत्ता चलती है। ज्यादा हिस्सों में इन्हीं स्थानों से विक्रम, ऑटो चलते हैं और इनके चालक गाड़ियों को वहां सड़क, चौराहों पर इस तरह खड़ा करते हैं कि काफी दूर तक जाम की स्थिति बन रहती है। जंक्शन, जॉनसेनगंज, दारागंज, कचहरी, तेलियरगंज में विक्रम, ऑटो चालकों की मनमानी कभी भी देखी जा सकती है। यहां गाड़ियां बीच सड़क पर खड़ी की जाती हैं। इसकी वजह से राहगीरों को परेशानी होती है।
शहर में प्रदूषण खत्म करने के साथ यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए विक्रम, ऑटो को शहर के बाहर करने की मांग हो रही है, लेकिन प्रशासन इसे लेकर गंभीर नहीं है। बल्कि उन्हें सीएनजी में बदलने की तैयारी की जा रही है। अडानी ग्रुप शहर में जल्द चार सीएनजी पंप लगाने जा रहा है। सवाल यह है कि जब इन वाहनों को शहर से बाहर करने की मांग हो रही है तो उन्हें सीएनजी से चलाने की क्या जरूरत है। तेलियरगंज के अरविंद जायसवाल, दारागंज के रत्नेश शुक्ला, गोविंदपुर के अनुज कुमार का कहना है कि सीएनजी से विक्रम, ऑटो चलने शुरू होंगे तो उनकी संख्या भी और बढ़ेगी। ऐसे में प्रदूषण तो शायद कम हो जाए इससे शहरियों की परेशानी और बढ़ जाएगी, जिस पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।