रेलवे में हादसे दर हादसे...अब थोड़ी राहत थी। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन कुछ घंटे पहले ही सुरक्षा, संरक्षा और समयपालनता का पाठ पढ़ाकर गए थे। ऐसे में जरा सी चूक रेल यात्रियों पर भारी पड़ जाती। आउट साइड कैरिंग एंड वैगन (सीएनडब्ल्यू) के कर्मचारियों के मुताबिक बोलिस्टर स्प्रिंग टूटने के बाद एनई एक्सप्रेस रफ्तार पकड़ती तो हजारों यात्रियों की जान खतरे में पड़ जाती। ऐसी स्थिति में गाड़ी के पटरी से उतरने की आशंका होती है। तेज रफ्तार में ट्रेन पटरी से उतरे तो उस स्थिति में होने वाले हादसे के बारे में ही सोचकर रूह कांप जाती है। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया।
तकनीकी जानकारों के मुताबिक बोलिस्टर स्प्रिंग टूटने से पहिए जाम हो जाते हैं। यह स्थिति पहियों और पटरी के घर्षण से आग लगने के लिए काफी होती है। चलती ट्रेन में आग लगने की घटना भी यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं होती हैं। हादसे के दौरान होने वाली अफरातफरी में यात्रियों का क्या हाल होता, इस बारे में बात करते हुए एनई सवार यात्री डरे-सहमे रहे।
एनई के एस-9 कोच सवार यात्री अनवर लुधियाना में टेलरिंग का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे साथ ट्रेेन सवार अन्य यात्री ट्रेन की लेटलतीफी से परेशान थे। उमस भरी गर्मी में जंक्शन से ट्रेन रवाना हुई तो लगा कि देर ही सही आनंदविहार ट्रेन पहुंचेगी तो वह लुधियाना के लिए दूसरी गाड़ी पकडेंगे। ऐसे में अचानक ट्रेन झटके से रुकी तो हमें लगा कि कुछ हो गया। गनीमत रही कि सब कुछ ठीक रहा।
रास्ते में भी आवाज से थी खराबी की शंका
एस- 9 कोच सवार यात्री मुफीज ने बताया कि दिन में तीन बजे के बाद गर्मी के कारण वह कोच गेट पर आए तो पहिए के पास से अजीब सी आवाज आ रही थी। उन्हें शंका हुई कि कोई खराबी है लेकिन वह इसे भांप नहीं पाए। यहां खराबी का पता चला तो एकबारगी झटका लगा। फिर कोच कटने से कष्टकारी यात्रा का अंदेशा हुआ लेकिन कोच लगाने से कुछ राहत हुई।
बोलिस्टर स्प्रिंग टूटने से क्षतिग्रस्त बोगी की सीट नंबर 18 के यात्री शकील ने बताया कि वह किशनगंज से वह तीन साथियों के साथ आनंद विहार फिर वहां से लुधियाना जाने के लिए निकले थे। ट्रेन लेट होने से सोमवार की टिकट तो खराब होगी लेकिन यहां जो कुछ हुआ उससे तो वे सब सहम गए। गनीमत रही कि कर्मचारियों ने खराब कोच हटाकर उन्हें आगे की यात्री के लिए सीट मुहैया करा दी। खतरे के बारे में सोचकर पसीना आ जाता है।
एनई के एस-9 कोच में सफर कर रहे शाहबाज भी चार साथियों के साथ तब दहशत में आ गए जब आउटर पर ट्रेन खड़ी हो गई। उन्होंने बताया कि गर्मी से परेशान लोग डिब्बों से नीचे उतर आए। गार्ड के साथ कई लोगों ने कोच के पास आकर पहियों के ऊपर लगी स्प्रिंग को देखा लेकिन चुप रहे। अफरातफरी के बीच किसी के कुछ न बताने पर डर बढ़ता ही जा रहा था।
एनसीआर कर्मचारियों के लिए आउट साइड कैरिंग एंड वैगन (सीएनडब्ल्यू) के टेक्निशियन-2 कृष्ण कुमार रविवार को मिसाल बन गया। उसकी सतर्कता से न केवल अफसरों की ‘नाक’ बच गई बल्कि एनई एक्सप्रेस में बैठे हजारों यात्रियों की जान पर आने वाला संभावित खतरा भी टल गया। सही मायने में उसका कर्त्तव्य पालन किसी बड़े हादसे को टाल गया।
एनई के प्लेटफार्म के बाहर होते ही आउट साइड में तैनात कृष्ण कुमार ने अपनी पारखी नजरों से बोलिस्टर स्प्रिंग खराब होने की सूचना अपने सुपरवाइजर को दी। सुपरवाइजर ने स्टेशन मास्टर केएम त्रिपाठी और स्टेशन मैनेजर राजाराम राजपूत को जानकारी दी। पलक झपकते ही दोनों अफसरों ने कंट्रोल को सूचित कर ट्रेन को रोकने का निर्देश गार्ड को दिया। गार्ड पीएन लाल ने मौके पर जाकर टूटी स्प्रिंग देखी। वहां कृष्ण कुमार भी मौजूद रहा। उसने गार्ड को इससे होने वाले खतरे बताए तो गार्ड ने अफसरों को सूचित किया। तब जाकर ट्रेन को प्लेटफार्म पर बैक कर लाया गया।