हरिसेनगंज-नई बस्ती में आयोजित मुशायरा में शामिल शायर
वरिष्ठ शायर अब्दुल जब्बार जाहिद की याद में एक अदबी शेरी नशिस्त (मुशायरा एवं कवि सम्मेलन) आयोजन किया गया। मऊआइमा की नई बस्ती में सोमवार रात आयोजित कार्यक्रम का आगाज शायर मकसूद दर्द ने नात-ए-पाक से की। युवा शायर आरिफ ने पढ़ा मेरी गुरबत को जो दुनिया मे नुमाइश कर दे...ऐसी इमदाद की सूरत मुझे मंजूर नही।
शमरा इलाहाबादी ने पढ़ा, दिल मेरा तोड़ने वाले तू सदा शाद रहे, तेरी खातिर मेरे लब पर ये दुआ है अब तक। शायर हसरत आइमी ने पढ़ा, बातों पे किसी की भी अब कैसे यकीं आए, जब राहे मोहब्बत में धोखे हैं बहुत खाए।
शायर सोज इलाहाबादी ने बेदार करना नींद से आसान है मगर, कोमा में पूरी कौम है कैसे जगाएं हम, जावेद जिया ने सच बात गर कहूं तो बुरा मानते हैं लोग, खामोश अगर रहूं तो मलामत करे जमीर और हास्य कवि अनवार गौहर भिवंडी ने पढ़ा कि मेहनत कशों की जब से वह हरकत निकल गई, शामिल हुआ हराम तो बरकत निकल गई...। संचालन मकसूद दर्द और अध्यक्षता हसरत आइमी ने किया।