हॉस्टलों में रहने वाले वैध छात्रों की पहचान अब उनकी फोटो से की जाएगी। छात्र समर हॉस्टल में रहे या सामान्य हॉस्टल में, उन्हें विश्वविद्यालय से जारी एक फॉर्म अपने पास रखना होगा, जिस पर उनकी फोटो लगी होगी। इसके साथ ही छात्र जब हॉस्टल छोड़ेंगे तो उन्हें फोटो लगा एक फॉर्म भी दिया जाएगा, जो इस बात की गारंटी होगा कि लौटने पर छात्र को हॉस्टल में कमरे का पुन: आवंटन शतप्रतिशत किया जाएगा।
वैध छात्र इस पशोपेश में हैं कि एक बार हॉस्टल छोड़ा तो दोबारा हॉस्टल मिलेगा या नहीं, शुक्रवार को कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने अपने कार्यालय में संवाददाताओं के समक्ष स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जो भी वैध छात्र हैं, उनमें से शतप्रतिशत छात्रों को हॉस्टल दोबारा आवंटित किए जाएंगे। हॉस्टल छोड़ते वक्त छात्रों को एक फॉर्म भरना होगा, जिसमें उनकी फोटो भी होगी। लौटने पर यही फॉर्म आईडी का काम करेगा अै इसी आधार पर छात्र को हॉस्टल दोबारा मिलेगा। वैध छात्रों को किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है।
छात्र जब सामान्य रूप से हॉस्टल में रहने लगेंगे, तब हर हॉस्टल के लिए दो नोडल अफसर नियुक्त किए जाएंगे। नोडल अफसर नियमित रूप से हॉस्टलों का निरीक्षण करते रहेंगे। नोडल अफसर छात्रों को दिए गए फॉर्म की तस्दीक करेंगे, जिसमें छात्रों की फोटो भी होगी। फॉर्म के आधार पर ही छात्रों की पहचान की जाएगी। कुलपति ने बताया कि जैसे-जैसे हॉस्टल खाली होते जाएंगे, मरम्मत का काम शुरू होता जाएगा। कुलपति के मुताबिक यूजीसी से मिली रकम से सिर्फ विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में काम कराया जाएगा, क्योंकि यूजीसी का यही मानक है। ट्रस्ट के हॉस्टलों की मरम्मत के लिए सभी ट्रस्टों को पत्र जारी कर दिया गया है। उनसे कहा गया कि हॉस्टल के खाली रहने की अवधि के दौरान ट्रस्ट अपने खर्च से मरम्मत का काम पूरा करा लें।
- कुलपति ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके पास ज्वाइनिंग की तिथि से अब तक हर दिन का वित्तीय लेखा-जोखा है। जो गड़बड़ियां हुई हैं, वह उनके आने से पहले हुई हैं। वह सिर्फ विश्वविद्यालय के हित में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद अगर सरकार उन्हें पद छोड़ने के लिए कहती है तो पांच मिनट में विश्वविद्यालय छोड़कर चले जाएंगे।
नए सत्र से छात्रों को हॉस्टल पाठ्यक्रमवार आवंटित किए जाएंगे। दूसरे कई हॉस्टलों में भी यही व्यवस्था लागू है। कुलपति ने बताया कि इससे छात्रों को काफी सहूलियत होगी। पठन-पाठन में छात्रों को दिक्कत नहीं होगी। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन हॉस्टलों पर बेहतर तरीके से निगरानी रख सकेगा।
कुलपति ने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हॉस्टलों को लेकर बवाल करने वाले उनके छात्र नहीं हैं। पुलिस ने जिन 58 छात्रों को नामजद किया है, उनमें 22 अवैध छात्र अवैध हैं। जेल में बंद वैध छात्रों के लिए कुलपति अपने स्तर से कुछ करेंगे? इस सवाल के जवाब में बोले कि पुलिस अपने स्तर से जांच कर रही है। छात्र वैध हो अवैध, हंगामा किया है तो भुगतना पड़ेगा।
कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू का कहना है कि जब उन्होंने ज्वाइन किया तो उनके सामने चार करोड़ रुपये बिजली का बकाया बिल रख दिया गया जबकि छात्रों से बिजली बिल के लिए शुल्क वसूला गया था। कुलपति ने बताया कि उन्होंने सभी अधीक्षकों को पत्र जारी कर पूछा है कि छात्रों से शुल्क लिया है तो पैसा कहां गया।