सिविल सेवा-2014 के फाइनल रिजल्ट में इलाहाबाद के प्रतियोगियों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। देर रात तक प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां से मात्र चार प्रतियोगियों ने देश की इस सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में सफलता पाई है। इनमें भी प्रथम 50 में दूर 300 में किसी का नाम शामिल नहीं है। यहां के प्रतियोगियों के निराशाजनक प्रदर्शन का यह क्रम 2011 में सीसैट लागू होने के बाद से है।
सिविल सेवा 2008 में यहां के 35, 2009 में 76 और 2010 में 55 अभ्यर्थी अंतिम रूप से चयनित हुए थे। 2009 में ईवा सहाय ने महिलाओं में पहला तथा मुख्य सूची में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। इन तीनों वर्षों में प्रथम 50 में दो-तीन प्रतियोगी शामिल रहे, लेकिन इसके बाद इलाहाबाद ही नहीं पूरी हिंदी पट्टी का रिजल्ट नीचे गिरता गया। 2011 में प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट लागू होने के बाद यहां के प्रतियोगी पहली बाधा ही नहीं पार कर पाए। जहां हर साल इलाहाबाद के तकरीबन एक हजार प्रतियोगी प्रारंभिक परीक्षा पास कर लेते थे वहीं, सीसैट लागू होने के बाद संख्या घटकर के 100 से नीचे आ गई। रही-सही कसर मुख्य परीक्षा में बदलाव ने पूरी कर दी।
मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषयों की संख्या दो के बजाय एक कर दी गई। इसकी जगह सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों की संख्या बढ़ गई। इस बदलाव को भी यहां के प्रतियोगी स्वीकार नहीं कर पाए और हिंदी पट्टी के प्रतियोगियों का ग्राफ इस प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में नीचे गिरता गया। रिजल्ट में गिरावट का यह क्रम शनिवार को घोषित फाइनल रिजल्ट में जारी रहा। इस तरह के निराशाजनक परिणाम का अंदाजा मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के बाद ही हो गया था। मुख्य परीक्षा में ही गिनती के अभ्यर्थी सफल हुए थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोधछात्र मनोज पांडेय ने 301वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की है। भूगोल विभाग के प्रो. बीएन मिश्रा के अंडर में शोध कर रहे मनोज सरसुंदर लाल हॉस्टल में रहते हैं। इनके अलावा विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी करने वाले मोहित मिश्रा ने 687वीं रैंक, दर्शनशास्त्र विषय से एमए करने वाले नागेश कुमार पांडेय ने 690वीं तथा विनोद कुमार यादव ने 1015वीं रैंक के साथ सफलता पाई है। तीनों विद्यार्थी एएन झा हॉस्टल के पुराछात्र रह चुके हैं।