गजब तो यह हुआ कि अप्रैल-मई के महीने में बिजली विभाग के लोग आए और गांव में सबका नाम कागज पर लिखकर ले गए, ताकि सबको कनेक्शन दिया जा सके। हालांकि, विभाग ने कनेक्शन तो नहीं दिए, लेकिन लोगों को बिजली चोरी का लाखों का चालान जरूर थमा दिया। गांव में सभी लोग मजदूरी करते हैं, किसी की भी हैसियत लाख रुपये का चालान भरने की नहीं है। यह नोटिस इसी अगस्त महीने में सभी को भेजा गया है।
गांव के ही रहने वाले राजू बताते हैं कि गांव के बाहर सड़क पर सरकारी ट्रांसफॉर्मर दो साल पहले जल गया था, पहले तो दो महीने तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जब दफ्तरों में ट्रांसफॉर्मर बदलने की अर्जी लगाई गई तो एक दिन विभाग के कर्मचारी आए और ट्रांसफॉर्मर लेकर चले गए। इस बात को लगभग दो साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक ट्रांसफॉर्मर बदला नहीं जा सका है।
सतीश निषाद बताते हैं कि कनेक्शन मांगते-मांगते गांव के लोग अब हार मान चुके हैं। कनेक्शन देने के बजाय लाखों रुपये का बिजली चोरी का नोटिस थमा देना तो अंधेर ही है। गांव के लोगों का कहना है कि जब विभाग ने कनेक्शन नहीं दिया तो लोग खुद ट्रांसफॉर्मर लगवाकर बिजली का इस्तेमाल करने को मजबूर हुए। वहीं, अरुण निषाद ने बताया कि गांव में 14 घंटे में केवल सात से आठ घंटे ही बमुश्किल बिजली मिल पाती है।
दूसरी ओर जब इन आरोपों पर अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उपखंड अधिकारी शिवानंद पांडेय और अधीशासी अभियंता ऋषि पाल सिंह दोनों के ही फोन नहीं उठे। मुख्य अभियंता ने मामले की जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने कहा इसकी जांच कराएंगे कि कनेक्शन क्यों नहीं दिया गया है।