इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मम्मी-पापा की लड़ाई में बच्चों को मोहरा नहीं बनाया जा सकता। यह उनके बचपन के साथ क्रूर खिलवाड़ है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत ने डाॅक्टर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उस वक्त की, जब मां के साथ रह रही पांच साल की बेटी अदालत में पेश हुई। अदातल से बातचीत में उसने कहा पापा गंदे है। यौन उत्पीड़न करते है। मम्मी को भी मारते है। इनके साथ नहीं रहना चाहती।
पिता की दलील
पिता के वकील ने दलील दी कि पहले कोर्ट ने पिता को वीडियो कॉल पर बातचीत करने का अधिकार दिया था। जबकि, मां बेटी को पिता से बात नहीं करने देती। बच्ची को उनके खिलाफ भड़काती हैं। उसे ऐसी आपत्तिजनक बातें सिखाई जा रही है, जो, उसके मानसिक और शारीरिक कल्याण के लिए ठीक नहीं है। अगर बच्ची मां के साथ रहती है तो वह निश्चित रूप से बिगड़ जाएगी। उसका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।