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Prayagraj News: दहेज हत्या से पति बरी, कोर्ट ने कहा- संकेत मिले तो हत्या की धारा में भी तय हो आरोप

Tue, 14 Jul 2026 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 38 वर्ष पुराने दहेज हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए इटावा निवासी चंद्रभान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि मौत से ठीक पहले मृतका को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था। इसलिए दहेज मृत्यु से जुड़ी भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-बी की वैधानिक धारणा इस मामले में लागू नहीं हो सकती।
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न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति डॉ अजय कुमार की खंडपीठ ने चंद्रभान की अपील स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि रद्द कर दी। कोर्ट ने पाया कि मृतका के माता-पिता ने स्कूटर या दस हजार रुपये की मांग के सामान्य आरोप लगाए, लेकिन किसी भी गवाह ने प्रताड़ना की कोई ठोस घटना, तिथि या स्थान नहीं बताया। वहीं, मृतका के 29 नवंबर 1987 के पत्र में भी दहेज मांग का जिक्र नहीं था। पत्र से यह संकेत मिला कि वह पति के अपनी विधवा भाभी के घर अधिक समय बिताने से मानसिक रूप से परेशान थी।
अदालत ने कहा कि कथित दहेज की मांग और एक मार्च 1988 को हुई मृत्यु के बीच कोई निकट और प्रत्यक्ष संबंध भी सिद्ध नहीं हुआ। अंतिम शिकायत अक्टूबर 1987 की थी, जबकि घटना लगभग चार महीने बाद हुई। ऐसे में दहेज मृत्यु और क्रूरता के आवश्यक तत्व साबित नहीं हुए।
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हाईकोर्ट ने यह भी माना कि घटना के बाद झुलसी हुई पत्नी को आरोपी खुद अस्पताल ले गया और उसे बचाने के प्रयास में उसके शरीर पर भी 15 प्रतिशत जलने के घाव आए। हालांकि मृतका के मृत्यु पूर्व बयान में हत्या का आरोप था, लेकिन जांच अधिकारी ने केवल दहेज हत्या का आरोपपत्र दाखिल किया और ट्रायल कोर्ट ने हत्या की धारा में आरोप तय ही नहीं किया।
फैसले में हाईकोर्ट ने राज्य की सभी ट्रायल कोर्ट को महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि यदि दहेज मृत्यु के मामलों में हत्या के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिले तो मुख्य आरोप हत्या तथा वैकल्पिक आरोप दहेज मृत्यु की धाराओं के तहत तय किए जाएं। अदालत ने इस निर्णय की प्रति उत्तर प्रदेश के सभी न्यायिक अधिकारियों को भेजने का भी निर्देश दिया।
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