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Prayagraj News: चक्की में पीसी भूख... मां के आंचल से निकली वर्दी

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हरिसेनगंज1-वर्दी में दरोगा बना बेटा देवेंद्र2-ममता की मूरत रामा देवी
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पति की मौत के बाद रतनसेनपुर की रामा देवी ने तीन दूधमुंहे बच्चों को पालने के लिए आटा-चक्का में अपनी भूख को पीसा। रातों में जगकर बच्चों के जीवन को गढ़ा। मां की ममता और मेहनत ने बेटे को वर्दीधारी बना दिया।
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हरिसेनगंज के रतनसेनपुर गांव की रामा देवी के पति श्यामलाल का निधन शादी के कुछ सालों के बाद हो गया। गोद में दुधमुंहा बेटा देवेंद्र और दो बेटियां शालिनी व प्रीति थे। पति की मौत के बाद अपनों ने भी साथ छोड़ दिया।
बच्चों को परवरिश देने के लिए आटा-चक्की का व्यवसाय शुरू किया। चक्की में दिन-रात खुद को पीसा। खुद आधे पेट रहकर बच्चों को भरपेट खाना दिया। तीनों बच्चों को मेहनत से पाला। उसी का नतीजा है कि बेटा देवेंद्र उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा के पद पर तैनात है। जबकि बेटियां अच्छे घरों में ब्याही गई हैं। रामा देवी कहती हैं, जब चक्की चलाते समय हमेशा जहन में बच्चों भविष्य की चिंता रहती थी। आज बच्चे सफल हैं तो मेहनत वसूल है।
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वक्त के साथ हालात बदले, बेटियों की शादी की


वक्त के साथ हालात बदले रामा देवी ने अकेले दम पर बेटी शालिनी और प्रीति की पढ़ाई से लेकर शादी तक जिम्मेदारी बखूबी संभाली। बेटे देवेंद्र को मेहनतकश बनने के लिए प्रेरित किया। शहर भेजकर उच्च शिक्षा दिलाई। इसी का परिणाम रहा कि मां के आंचल से वर्दी निकली।
आईएएस बनना चाहते हैं देवेंद्र


दरोगा बनने के बाद देवेंद्र का सपना आईएएस बनने का है। वह इसके लिए तैयारी भी कर रहे हैं। देवेंद्र कहते हैं कि मां ने खुद चक्की में पिसकर हमें गढ़ा है। आईएएस बनकर मां को सबसे बड़ा तोहफा देना ही उद्देश्य है।
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