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गृहकर बढ़ोतरी के नाम पर शहरियों को किया जा रहा गुमराह

Wed, 24 Feb 2016 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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व्यावसायिक भवनों के गृहकर को लेकर शहरियों में बनी भ्रम की स्थिति पर नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय ने सोमवार को विराम लगा दिया। साथ ही यह भी कहा कि कुछ लोग गृहकर बढ़ोतरी के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। साफ किया कि टैक्स में किसी रह की बढ़ोतरी नहीं की गई, बल्कि धारा 174 में संशोधन करते हुए उत्तर नगर निगम (सम्पत्ति कर) नियमावली वर्ष 2000 में दिसंबर 2013 द्वितीय संशोधन होने के बाद उसी के आधार पर अनावासीय भवनों का पुनर्मूल्यांकन किया गया। स्पष्ट किया कि वर्तमान में व्यावसायिक भवनों के लिए वर्ष 2011 में निर्धारित न्यूनतम मासिक किराएदारी की दर ही लागू है।
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संवाददाताओं से बातचीत में नगर आयुक्त ने कहा कि प्रत्येक दो वर्ष में मासिक किराएदारी की दर में परिवर्तन किया जाना चाहिए लेकिन इस दर में भी किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया। बताया कि सम्पत्ति कर नियमावली में संशोधन के बाद नर्सिंगहोम-लॉज पर आवासीय टैक्स का तीन गुना, दुकान-होटल पर पांच गुना और मॉल पर आवासीय टैक्स का छह गुना तक गृहकर बढ़ा है। पिछले वर्ष मार्च में कार्यकारिणी की बैठक में फैसला हुआ था कि छूटे व्यावसायिक भवनों को टैक्स के दायरे में लाया जाए। सर्वे में करीब 1800 भवन शामिल हुए। इन भवनों का क्षेत्रफल, मूल्यांकन, टैक्स समेत पूरा ब्योरा तैयार कर सभी पार्षदों को सूची उपलब्ध कराई गई। इसके बाद लोगों से आपत्ति भी मांग गई ताकि किसी तरह की गड़बड़ी होने पर उसे ठीक किया जा सके।
बताया कि वर्तमान में भी आपत्ति ली जा रही है। इस बीच बिल जनरेट कर जारी किए गए लेकिन भ्रम फैलाया जा रहा है कि व्यावसायिक भवनों का टैक्स पांच-छह गुना तक वृद्धि की जा रही है, जबकि नए नियम में केवल व्यावसायिक भवनों में आरोपित होने वाले मासिक किराएदारी की दर का गुणांक उसी क्षेत्र के व्यावसायिक दर के लिए निर्धारित किया गया है। बताया कि प्रमोशन सरचार्ज के दायरे में आने वाले भवनों की संख्या 40-50 के बीच है।
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