मामले में एक आईएएस, एसडीएम तथा एक अन्य पीसीएस अधिकारी के अलावा तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल समेत अन्य कर्मचारियों की भी मिलीभगत की बात सामने आ रही है। 2015 में झूंसी में एक और जमीन घोटाला हुआ था। उसमें रेलवे की जमीन बेच दी गई थी। उस मामले में इन अफसरों के नाम सामने आए थे। एक पीसीएस अधिकारी तो निलंबित भी किए गए थे।
फूलपुर में ही उसी दौरान का अब नया जमीन घोटाला सामने आया है। ऐसे में दोनों मामलों को जोड़कर देखा जा रहा है। उस दौरान जिले तथा तहसील में तैनात अफसर जांच कमेटी की रडार पर हैं। सभी का विवरण तैयार किया जा रहा है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि जमीन जिनके नाम की गई है उनकी अफसरों के साथ क्या संबंध हैं।
संभवत: पहली बार डीएम को दी गई है जांच
1800 बीघे जमीन दूसरों के नाम की गई है जिसकी कीमत नौ से 10 अरब रुपयेे बताई जा रही है। इसके अलावा इसमें कई वरिष्ठ अफसरों की संलिप्तता मानी जा रही है। ऐसे में जांच सीधे डीएम को सौंपी गई है। ऐसा संभवत: पहली बार हुआ है जब जमीन घोटाले की जांच डीएम को सौंपी गई है।