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हॉलैंड हाल हॉस्टल में पानी के लिए हंगामा

Tue, 02 Apr 2019 02:17 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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allahabad - फोटो : allahabad
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हॉलैंड हॉल हॉस्टल में पेयजल और साफ-सफाई के मुद्दे पर सोमवार को काफी हंगामा हो गया। छात्रों ने डीएसडब्ल्यू और चीफ प्रॉक्टर का घेराव किया। इससे भी बात नहीं बनी तो हॉस्टल के कोऑर्डिनेटर डॉ. अशोक मसीह को बंधक बना लिया। मामला बढ़ने पर पुलिस और जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रशासन के प्रतिनिधियों ने छात्रों को आश्वस्त किया कि जल्द ही उनकी समस्याओं का निराकरण हो जाएगा। इसके बाद छात्र शांत हुए।
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हॉलैंड हॉल में पेजयल के लिए लगा आरओ तीन माह से खराब पड़ा है। हॉस्टल में जगह-जगह गंदगी और कूड़े का ढेर है। इन दिनों इविवि की वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं, जिससे छात्रों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। इसी हॉस्टल में छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव रहते हैं। सोमवार को छात्रसंघ उपाध्यक्ष के नेतृत्व में हॉस्टल के छात्रों की भीड़ डीएसडब्ल्यू कार्यालय पहुंच गई। वहां चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे और डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार का घेराव किया गया। डीएसडब्ल्यू ने कहा कि हॉलैंड हॉल हॉस्टल ट्रस्ट के अधीन आता है। ऐसे में इविवि प्रशासन कुछ नहीं कर सकता है।

डीएसडब्ल्यू के इस जवाब से खिन्न होकर छात्र सीधे हॉस्टल परिसर में कोऑर्डिनेटर डॉ. अशोक मसीस के आवास पहुंच गए और उन्हें साथ लेकर हॉस्टल चले आए। छात्रों ने कोऑर्डिनेटर को बंधक बना लिया। मामला बढ़ने पर एसीएम प्रथम, सीओ कर्नलगंज भारी फोर्स के साथ वहां पहुंचे। सभी ने हॉस्टल का निरीक्षण किया और एसीएम प्रथम ने हॉस्टल प्रशासन को निर्देश दिए कि पेयजल की व्यवस्था तत्काल दुरुस्त की जाए। साथ ही कूड़ा हटाकर साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था की जाए। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
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हंगामे के बाद डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार ने हॉलेंड हॉल हॉस्टल के अधीक्षक को पत्र लिखकर आड़े हाथों लिया। पत्र में उन्होंने लिखा कि शुद्ध पेयजल एवं स्वच्छता भारत सरकार की प्राथमिकता है। हॉलैंड हॉल ट्रस्ट से संचालित हॉस्टल है, इसलिए ट्रस्ट की ओर से वहां शुद्ध पेयजल के लिए तत्काल वाटर कूलर एवं आरओ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। शौचालय, स्नानागार एवं परिसर में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था की जाए। छात्रों ने यह शिकायत भी की है कि छात्रावास शुल्क का भुगतान नगद में लिया गया है जो इविवि के वित्तीय नियमों की अनदेखी है। ऐसे में भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
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