इसी दौरान उन्हें पाकिस्तानी एथिकल हैकर रफे बलौच की एक पुस्तक हाथ लगी। उसे पढ़कर उनका रुझान इस तरफ हुआ और वह इंटरनेट पर इसके बारे में पढ़ने और जानकारी हासिल करने लगे। बीटेक की पढ़ाई के दौरान 2012 में अंकित के एक दोस्त ने भारत के एथिकल हैकर अंकित फाडिया की पुस्तक ‘नेटवर्क सिक्योरिटी: हैकर्स पर्सपेक्टिव’ दी। किताब की छाया प्रति कराकर उन्होंने किताब पढ़ी।
अंकित फाडिया भारत के डिजिटल इंडिया के ब्रांड एंबेसडर भी रहे हैं। बीटेक की पढ़ाई के दौरान भी अंकित सिंह अपना पूरा समयएथिकल हैकिंग के बारे में इंटरनेट पर नई-नई चीजों के बारे में जानकारी जुटाते रहते। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह हैदराबाद की एक कंपनी में नौकरी करने लगे। लेकिन अपने शौक को बरकरार रखा। जब उन्हें मौका मिलता। वह इस काम में जुट जाते और नामी कंपनियों की वेबसाइट पर बग खोजने लगते।
क्या है बग और एथिकल हैकर
आप अक्सर सुनते हैं कि इस संस्थान की वेबसाइट को साइबर शातिरों ने हैक कर लिया। वेबसाइट की वह कमी या त्रुटि जिसके चलते वेबसाइट हैक होती है। उस खामी(कमी, त्रुटि) को बग कहते हैं। एथिकल हैकर वह होते हैं, जो लीगल तौर पर किसी भी वेबसाइट पर जाकर उनकी कमी (बग) को खोजते हैं और उसे बताते हैं। साथ ही बताते हैं कि इस कमी को कैसे दूर किया जा सकता है। ताकि वेबसाइट को हैक होने से बचाया जा सके।
विभिन्न मंत्रालयों के लिए भी किया है काम
अंकित ने बताया कि वह भारत की विभिन्न मंत्रालयों की वेबसाइट की सुरक्षा टीम से भी जुड़े रहे हैं। वह भारत सरकार की प्रमुख वेबसाइट एनआईसी की साइबर सिक्योरिटी टीम का भी हिस्सा रहे हैं।