भीषण गर्मी और महंगाई का असर अब गंगापार के बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। लोगों की दिन में घरों से कम आवाजाही ने कारोबार की रफ्तार तोड़ दी है। हमेशा ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहने वाले झूंसी के बाजार इन दिनों सूने नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि कारोबार महज 25 से 30 फीसदी तक सिमट गया है। कपड़ा कारोबारियों का कहना है कि शाम पांच-छह बजे के बाद कुछ ग्राहक बाजार पहुंचते हैं लेकिन उससे भी कारोबार को खास राहत नहीं मिल पा रही। कपड़ा के साथ ही किराना, सराफा और स्पोर्ट्स सामान समेत लगभग हर सेक्टर के कारोबारी नुकसान झेल रहे हैं। कई दुकानदारों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए दुकान बंद करने का समय भी बढ़ा दिया है। वहीं बढ़ती महंगाई एवं लगातार हो रही बिजली कटौती से व्यापारियों की परेशानी और बढ़ गई है।
हर सेक्टर के व्यापारियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
झूंसी के अनवर मार्केट के कपड़ा कारोबारी तौहीद खान, इश्तेखार अहमद का कहना है कि पहले जहां रोजाना 50 से 60 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती थी, वहीं अब यह घटकर 10 से 15 हजार रुपये तक रह गई है। उनका कहना है कि इतनी कम बिक्री में दुकानों का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। कपड़ा कारोबारी सरदार रविंद्र सिंह एवं नितिन कुमार ने बताया कि महंगाई के बीच ग्राहकों की कमी ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। शाम को कुछ ग्राहक आते हैं, लेकिन उससे कारोबार संभल नहीं पा रहा। पंखा, एसी और बिजली का खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है। हर दिन 70 से 80 फीसदी तक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
बिजली कटौती और ग्राहकों की घटती संख्या से 70-80 फीसदी तक घटा कारोबार
कपड़ा कारोबारियों का कहना है कि बाजार में भी इस समय पूरी तरह सन्नाटा है। उन्होंने कहा कि गर्मियों में लोग घूमने बाहर चले जाते हैं, मलमास का असर भी बाजार पर पड़ा है और भीषण गर्मी ने ग्राहकों की संख्या और घटा दी है। रात में लोग निकल रहे हैं लेकिन जरुरी कपड़े ही खरीद कर रहे हैं। कपड़ा व्यापारी सरदार रविंद्र सिंह एवं अहमद खान ने बताया कि बीते एक सप्ताह से बाजार में सन्नाटा पसरा है। व्यापारियों को बकरीद से कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन बकरीद के एक दिन पहले भी ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि शाम को थोड़ी रौनक बढ़ती है इसलिए दुकानों के बंद होने का समय भी एक घंटा बढ़ा दिया गया है। ऑनलाइन कारोबार ने पहले ही व्यापारियों को कमजोर कर दिया था, अब गर्मी और महंगाई ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।