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प्रयागराज: तर्क के डिक्टेटर थे नामवर सिंह, स्मृति सभा में याद किए गए आलोचना के शिखर पुरुष

Sat, 23 Feb 2019 03:18 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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प्रलेस, जलेस एवं जसम की ओर से शुक्रवार को निराला सभागार में जुटे रचनाकारो ने आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह को याद किया। बतौर अध्यक्ष प्रो.राजेंद्र कुमार ने कहा, नामवर सिंह और रामविलास शर्मा उस समय की आलोचना के दो पाट थे । इन दो पाटों से बचना मुश्किल था लेकिन इन दो पाटों से आलोचना का अंतर्द्वंद  विकसित हुआ। उनका दायरा तो दिल्ली बना लेकिन उनका चिंतन आधार इलाहाबाद था।
 
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नामवर जी विवादों में रहना स्वयं पसंद करते थे क्योंकि उनका मानना था कि इससे ठहरे हुए जल को गति मिलती है । संतोष भदौरिया ने कहा, कहन की अपेक्षा उनका स्वयं का लेखन ज्यादा प्रामाणिक व प्रभावी है।रामप्यारे राय ने कहा, नामवर जी लिविंग लीजेंड थे। सुधांशु मालवीय ने उनके अध्यापकीय कौशल और श्री प्रकाश मिश्र ने लेखन के अंतर्विरोधों की बात की । प्रणय कृष्ण ने कहा कि उनका व्यक्तित्व जेएनयू के लोकतांत्रिक माहौल के एकदम अनुकूल था।

 
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हिंदी पट्टी में विकसित गुरुडम, स्टारडम और पांव छुआई के वह बिल्कुल खिलाफ थे । अस्मिता विमर्शों जैसे दलित या स्त्री का उन्होंने निषेध किया, जो तब भी बहस तलब और अब भी है। सेन्टर ऑफ मीडिया स्टडीज के कोर्स कोआर्डिनेटर धनंजय चोपड़ा ने कहा नामवर जी के पास पत्रकारिता का विजन था ।

 

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अमितेश ने अंतिम दिनों में लिए उनके इंटरव्यू के हवाले से कहा कि वह अंत तक अध्ययन में अद्यतन और स्मृतियों को संजोए रखना चाहते थे। रामजी राय ने कहा किसी भी बड़े आदमी के जीवन में अंतर्विरोध होते हैं लेकिन उन पर बात करने से उसका कद छोटा नहीं होता।श्रद्धांजलि सभा का संचालन समकालीन जनमत के संपादक केके पांडेय ने किया।

 
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सभा में अनिल रंजन भौमिक, अशोक त्रिपाठी, प्रियदर्शन मालवीय. सूर्य नारायण, सुनील विक्त्रस्म सिंह अविनाश मिश्र, प्रवीण शेखर, अनुपम परिहार, शिवानंद आदि ने भी अपने संस्मरण एवं विचार साझा किए। सभा में नसीम अंसारी, हरिश्चंद्र द्विवेदी,एटक सचिव रामसागर, एक्टू सचिव डॉ कमल, कथाकार नीलम शंकर,अशरफ अली बेग, असरार गांधी,अंशुमान कुशवाहा, फजले हसनैन,अनु पटेल, डॉ आरपी सिंह, डॉ सरोज सिंह, डॉ दीनानाथ,निरंजन सिंह,प्रोफेसर विवेक तिवारी,कुमार वीरेंद्र, राजू, शिवकुमार आदि मौजूद थे।'
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