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हिंदी भाषा हमारा ओढ़ना और दसौना

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Hindi diwas celebrated at Ishwar sharan college, AU - फोटो : CITY DESK
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ईश्वर शरण कॉलेज में हुए व्याख्यान में बोलीं मालिनी अवस्थी
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लोक गीतों के माध्यम से की लोक भाषा के शब्दों की व्याख्या
प्रयागराज। हिंदी से उदार और लचीली भाषा कोई हो ही नहीं सकती। हिंदी भाषा हमारा ओढ़ना और दसौना, दोनों है। यह बात पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने शनिवार को ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ‘लोकभाषा और हिंदी’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में कहीं। उन्होंने लोक गीतों के माध्यम से लोक भाषा के तमाम शब्दों की व्याख्या की, जैसे भसकना, मुनक्का, फूफा, बालम, देवर, ससुर, सास आदि।
कहा कि हिंदी फिल्मों ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक अपनी सांगीतिक भाषा के माध्यम से सबको बांध रखा है। उन्होंने हिंदी फिल्म कलाकारों की ओर संकेत करते हुए कहा कि कलाकारों से ज्यादा पारखी किसी और की नजर हो ही नहीं सकती। हिंदी वैज्ञानिक भाषा है, जो जन-जन में बड़ी आसानी से संप्रेषित हो जाती है। उन्होंने सोशल मीडिया का उदारण देते हुए कहा कि हिंदी लिखने और पढ़ने वालों की संख्या बढ़ी है। इसके साथ उन्होंने भाषा के आंचलिकता और उसके देश रूप पर भी अपनी बात रखी।
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अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि हिंदी जन-जन की भाषा है। इसका संपूर्ण विकास और इसे बचाए रखना हम सबका कर्तव्य है। अध्यक्षता कर रहे शासी निकाय के अध्यक्ष्द्वा आरके श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी भाषा के तमाम शब्द विलुप्त हो रहे हैं। इन्हें प्राय: प्रयोग में लाना होगा और हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने में पूरा सहयोग करना होगा। कार्यक्रम का संचालन गायत्री सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आलोक मिश्र ने किया। इस मौके पर डॉ. सुमन अग्रवाल, डॉ. मनोज दुबे, डॉ. विवेक कुमार राय, डॉ. श्रुति आनंद, डॉ. मान सिंह आदि मौजूद रहे।
हिंदी को रोजगार से जोड़ने पर जोर
प्रयागराज। महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र इलाहाबाद में शनिवार से हिंदी पखवाड़े की शुरुआत हुई। इस दौरान वक्ताओं ने हिंदी भाषा को रोजगार से जोड़ने और भाषा के विकास के लिए संवैधानिक प्रयास एवं उसमें संशोधन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अनुभाग अधिकारी शंभूदत्त सती ने हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं के संवर्धन पर जोर दिया। समाजकार्य के प्राध्यापक डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि आजादी के संघर्ष में क्षेत्रीय भाषाओं ने पूरे देश को एकजुट किया। राजनीति विज्ञान की अध्यापक डॉ. आशा मिश्रा ने कहा कि हिंदी भाषा के पिछड़ेपन के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। वहीं, अनुवाद अध्ययन की सहायक प्राध्यापक डॉ. अनुराधा पांडेयने कहा कि भाषा के रूप में हिंदी को स्थापित करने का उपक्रम बलवान होना चाहिए। कार्यक्रम में अरुण चौधरी, केंद्र प्रभारी प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने भी अपने विचार रखे। संचालन डॉ. सुशील पांडेय एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अवंतिका शुक्ला ने किया। कार्यक्रम में विरोद वैद्य, देवमूर्ति द्विवेदी, राहुल, प्रमोद, रश्मि, अंजलि, आकाश आदि उपस्थित रहे।
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निबंध प्रतियोगिता में अव्वल रहे सर्वेश
प्रयागराज। इलाहाबाद डिग्री कॉलेज की सांस्कृति समिति की ओर से हिंदी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ‘विकासोन्मुख जम्मू कश्मीर की संवैधानिक वस्तुस्थिति और सार्थकता’ विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में विधि तृतीय सेमेस्टर के छात्र सर्वेश यादव अव्वल रहे जबकि विधि प्रथम सेमेस्टर के छात्र अनुज मिश्र को दूसरा एवं एमए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा सलमा खातून को तीसरा स्थान मिला। इसके अलावा साची शमा एव ंकामिनी सिंह को सांत्वना पुरस्कार मिला। सफल प्रतिभागियों को डीआईजी केपी सिंह एवं हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने पुरस्कृत किया। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. अतुल कुमार सिंह, सांस्कृति समिति के संयोजक डॉ. राजेंद्र त्रिपाठी रसराज आदि मौजूद रहे।
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