वन विभाग के दैनिक कर्मियों को न्यूनतम वेतन का मामला
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वन विभाग के दैनिक और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के न्यूनतम वेतन का भुगतान के आदेश का पालन न करने पर अपर मुख्य सचिव को तलब कर लिया है। उनको पांच नवंबर को अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। कोर्ट ने आदेश की अवहेलना करने पर नाराजगी व्यक्त की है। कहा कि सरकार न तो कर्मियों को न्यूनतम वेतन दे रही है और न ही इस बारे में उसके हलफनामे में कोई जानकारी दी गई है।
हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को राज्य सरकार को वन विभाग के अस्थायी कर्मियों को एक दिसंबर 18 से न्यूनतम वेतन देने का निर्देश दिया था और प्रमुख सचिव वन विभाग से दो सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था। हलफनामा दाखिल किया, मगर वेतन भुगतान आदेश के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने शेख झील पक्षी विहार अलीगढ़ के दैनिक कर्मी इशाक मोहम्मद की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता पंकज श्रीवास्तव ने बहस की। इनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग के सभी अस्थायी, दैनिक संविदा, कैजुअल और तदर्थ आदि कर्मियों को न्यूनतम वेतन के बराबर वेतन देने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने वेतन के लिए धनराशि जारी नहीं की। उल्टे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जारी आदेश को वापस ले लिया। 13 अगस्त 19 के इस आदेश को भी याचिका में संशोधन अर्जी से चुनौती दी गई।
कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन करने के बजाए कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद बिना कोर्ट की अनुमति के निर्देशों का पालन करने के आदेश को वापस ले लिया गया। कोर्ट ने सरकार की इस कार्यवाही को प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण करार दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार के 13 अगस्त 19 के आदेश पर रोक लगा रखी है और प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था। प्रमुख सचिव ने हलफनामा तो दिया मगर उसमेें मांगी गई जानकारी नहीं थी।