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उच्चतर शिक्षा आयोग के दो सदस्यों की नियुक्ति को चुनौती

Sat, 03 Sep 2016 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद। उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग के सदस्यों की नियुक्तियां एक बार फिर विवादों में है। तीन सदस्यों की नियुक्तियां हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद दो और सदस्यों डॉ. रामेंद्र बाबू चतुुर्वेदी और अजब सिंह यादव की नियुक्ति भी रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस दिलीप गुप्ता और जस्टिस एमके गुप्ता की पीठ ने सदस्यों और आयोग तथा प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई तीन अक्तूबर को होगी।
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राकेश सिंह ने याचिका दाखिल कर रामेंद्र बाबू और अजब सिंह की नियुक्ति को चुनौती दी है। याची के अधिवक्ता आदर्श सिंह ने बताया कि रामेंद्र बाबू की नियुक्ति उसी प्रक्रिया के तहत की गई है, जिस प्रक्रिया के द्वारा पूर्व के तीन सदस्यों की नियुक्तियां की गई थीं। हाईकोर्ट ने तीन सदस्यों की नियुक्तियां यह कहते हुए रद्द कर दी थी कि सदस्यों के चयन में किसी मानक का पालन नहीं किया गया। न ही नियमानुसार विज्ञापन जारी किया गया और न ही अन्य योग्य उम्मीदवारों को चयन में शामिल किया गया। इसी प्रकार से रामेंद्र बाबू की नियुक्ति भी बिना विज्ञापन जारी किए और बिना अन्य उम्मीदवारों को मौका दिए की गई है। इतना ही नहीं रामेंद्र बाबू पीजी कालेज के प्राचार्य पद के चयन में फेल हो चुके हैं। 
अजब सिंह यादव की नियुक्ति को यह कहते हुए चुनौती दी गई है कि अजब सिंह विज्ञापन संख्या 39/2006 के तहत पीजी कालेज के प्राचार्य चयनित हुए थे। इस नियुक्ति को पहले हाईकोर्ट ने और बाद में सुप्रीमकोर्ट ने अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। याचिका दाखिल होने के बाद आयोग ने प्रदेश सरकार को पत्र लिखा कि अजब सिंह की सदस्यता समाप्त कर दी जाए क्योंकि उनका प्राचार्य पद पर चयन सुप्रीमकोर्ट द्वारा रद्द किया जा चुका है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व आयोग के सदस्य डॉ. अनिल सिंह, डॉ. रामवीर सिंह यादव और डॉ. उदल यादव की नियुक्तियां हाईकोर्ट द्वारा रद्द की जा चुकी हैं। जबकि आयोग के अध्यक्ष रहे लाल बिहारी पांडेय की नियुक्ति को भी अनियमित मानते हुए कोर्ट ने रद्द कर दिया था। 
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