हाईकोर्ट ने विधानसभा चुनाव 2012 में चुनाव खर्च का ब्यौरा नहीं देने वाले प्रत्याशी की योग्यता पर निर्वाचन आयोग को फिर से विचार करने के लिए कहा है। कोर्ट ने आयोग से कहा है कि प्रत्याशी से खर्च का ब्यौरा लेने के बाद उसे अयोग्य करार देने के निर्णय पर फिर से विचार किया गया जाए। मैनपुरी से विधानसभा उम्मीदवार रहे शैलेंद्र सिंह ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। आयोग ने शैलेंद्र सहित करीब 40 उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव 2012 के खर्च का ब्यौरा नहीं देने के कारण आगामी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया है।
याची के अधिवक्ता भगवती प्रसाद सिंह ने कहा कि चुनाव के बाद याची ने खर्च का ब्यौरा दिया था मगर चुनाव आयोग उससे संतुष्ट नहीं हुआ। उसे 2013 में नोटिस जारी किया गया और इसके बाद अयोग्य करार दे दिया गया। याची की आपत्तियों को चुनाव आयोग ने नहीं सुना। निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि याची को नोटिस जारी कर चुनाव खर्च का सही ब्यौरा देने को कहा गया। उसने नहीं दिया तो मजबूर होकर आयोग को कड़ा कदम उठाना पड़ा। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 11 के तहत याची के मामले में पुनर्विचार कर निर्णय लिया जाए। याची शैलेंद्र सिंह को एक सप्ताह में अपना चुनाव खर्च आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। आयोग इस पर दो सप्ताह में निर्णय लेगा।