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चुनाव में वाहनों की जब्ती पर होगा पुनर्विचार

Wed, 15 Feb 2017 02:09 AM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
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लोकसभा या विधान सभा चुनाव के दौरान चुनाव कार्य के लिए निर्वाचन अधिकारी को प्राइवेट वाहनों (चालक या स्वामी सहित) की जब्ती का अधिकार है। हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के इस निर्णय पर दूसरी खंडपीठ पुनर्विचार करेगी। प्राइवेट वाहनों की जब्ती के खिलाफ हाईकोर्ट में मेरठ से दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई। इन हाईकोर्ट की दो भिन्न खंडपीठों ने सुनवाई की।
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अरविंद कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की पीठ ने कहा कि निर्वाचन नि:संदेह एक जनहित का कार्य है और इसमें प्राइवेट वाहन स्वामी का अधिकार थोड़े समय के लिए ही निलंबित होता है। इसके एवज में उसे मुआवजा भी मिलता है। निर्वाचन के लिए वाहनों की जब्ती से मोटर वेहिकल एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं होता है। जबकि याची की दलील थी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और मोटर वेहिकल एक्ट के तहत राज्य सरकार को निजी प्रयोग के वाहनों की जब्ती का अधिकार नहीं है।

इसी संबंध में दाखिल सुमित सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अभय कुमार की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने अंतरिम आदेश से याची के वाहन की जब्ती रोक दी थी। मामले की अगली सुनवाई पर पीठ के समक्ष अरविंद कुमार के मामले में पारित खंडपीठ का निर्णय रखा गया। याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी की दलील थी कि इस मामले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है क्योंकि अरविंद कुमार केस में खंडपीठ ने मोटर वेहिकल एक्ट के कई प्रावधानों पर विचार नहीं किया गया है। एक्ट की धारा 66 सपठित धारा 192 ए सपठित धारा 2(26) आदेशात्मक हैं। इन पर विचार किया जाना आवश्यक है।
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सुमित सिंह केस की सुनवाई कर रही पीठ ने प्रथम दृष्टया इस बात पर सहमति जताई कि इस मामले पर विचार करने की आवश्यकता है। पीठ प्रदेश सरकार को याची के अधिवक्ता द्वारा उठाए सवालों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई 22 फरवरी को होगी। मगर पीठ ने इस मामले में दिया अंतरिम आदेश समाप्त कर दिया है।
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