समाजवादी पार्टी के नेता नाहिद हसन
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली कैराना के सपा विधायक नाहिद हसन की धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जान से मारने की धमकी देना आदि की धाराओं में दर्ज मुकदमे में जमानत मंजूर कर ली है। जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति अजीत सिंह ने सुनवाई की। बता दें कि नाहिद हसन और 11 अन्य लोगों के खिलाफ कैराना थाने में वादी मो. अली ने 2018 में मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप है कि वादी ने महमूद अली के साथ एक जमीन की बिक्री का सौदा किया था। इस सिलसिले में उसने कई लोगों से रकम उधार ली थी। बाद में विधायक नाहिद हसन के दबाव में महमूद अली ने वह जमीन विधायक के आदमी हकम अली के नाम बेच दी। आरोप है कि विधायक ने महमूद अली को अपने घर बुलाकर दबाव डाल कर जमीन हकम अली के नाम बेचने को मजबूर किया। उसने जान से मारने की धमकी दी और गालियां दीं।
विधायक का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी का कहना था कि याची राजनीतिक व्यक्ति है। उसे पार्टी बंदी के चलते झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। याची ने कोई आर्थिक लाभ नहीं लिया और न ही वादी को कोई नुकसान पहुंचाया है। वह जनवरी 2020 से जेल में बंद है।
कोर्ट ने मुकदमे के तथ्यों पर कोई राय व्यक्त किए बिना विधायक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। शर्त लगाई है कि विधायक साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और विवेचना में सहयोग देंगे। जमानत प्रावधानों का उल्लंघन करने पर उनकी जमानत निरस्त की जा सकती है।