कोर्ट की टिप्पणी
ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का मूल्यांकन करते समय न्यायिक विवेक का सही प्रयोग नहीं किया। केवल नामजदगी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। - इलाहाबाद हाईकोर्ट
पिता की दाखिल अपील, बेटे ने निस्तारित कराई
हाईकोर्ट पहुंचे तीनों मुल्जिमों की ओर से 1987 में अपील दाखिल करने वाले अधिवक्ता कमलेश्वर सिंह भी दुनिया में नहीं रहे। इसके बाद कोर्ट ने मुकदमे की पैरवी के लिए विजेता गुप्ता को न्याय मित्र नियुक्त किया। अंतत: कमलेश्वर की दूसरी पीढ़ी के वकील उनके बेटे गोपाल सिंह ने अपील में बहस की और निस्तारण कराया।