इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों के मुकरने से जख्म नहीं छिपते। वह चीख-चीख कर घटना की गवाही देते हैं। लिहाजा, हत्या के आरोपी पति को केवल इस आधार पर जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता कि पीड़िता की मां और अन्य गवाह ट्रायल में पक्षद्रोही हो गए हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों के मुकरने से जख्म नहीं छिपते। वह चीख-चीख कर घटना की गवाही देते हैं। लिहाजा, हत्या के आरोपी पति को केवल इस आधार पर जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता कि पीड़िता की मां और अन्य गवाह ट्रायल में पक्षद्रोही हो गए हैं। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने कासगंज निवासी आकाश की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी।
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कहा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर 12 गंभीर चोट और उसके अंदरूनी अंगों का क्षतिग्रस्त होना मामले की भयावहता को दर्शाता है।मामला सहावर थाना क्षेत्र का है। नौ जुलाई 2022 को लक्ष्मी देवी ने बेटी की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि शादी के चार साल बाद भी ससुरालवाले पांच लाख रुपये और बाइक की मांग को लेकर उनकी बेटी राखी को प्रताड़ित कर रहे थे।
मांग पूरी न होने पर उसकी हत्या कर दी गई। मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने पति आकाश को जेल भेज दिया। जमानत पर रिहाई की मांग के साथ हाईकोर्ट पहुंचे पति की ओर से दलील दी गई कि कि राखी सीढ़ियों से गिर गई थी। इस मामले में मुख्य गवाह (मृतका की मां), एक ग्रामीण और पंचायत गवाह ट्रायल के दौरान अपनी गवाही से पलट गए हैं।कोर्ट ने पाया कि मृतका की मौत शादी के महज चार साल के भीतर उसके ससुराल में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मुताबिक उसकी मौत सदमे और अत्यधिक खून बहने के कारण हुई।