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हाईकोर्ट : पीड़िता की भरोसेमंद गवाही दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त, नाबालिग से दुष्कर्म में मिली सजा बरकरार

Wed, 28 Oct 2026 12:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता की भरोसेमंद गवाही दोषसिद्ध के लिए पर्याप्त साक्ष्य है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने नाबालिग संग दुष्कर्म के दोषी को मिली 10 साल की सजा बरकरार रखी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता की भरोसेमंद गवाही दोषसिद्ध के लिए पर्याप्त साक्ष्य है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने नाबालिग संग दुष्कर्म के दोषी को मिली 10 साल की सजा बरकरार रखी।

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कोर्ट ने गाजियाबाद निवासी दोषी की सजा के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी। साथ ही स्पष्ट किया कि मेडिकल साक्ष्य में चोट नहीं मिलने और एफआईआर दर्ज कराने में देरी पीड़िता की गवाही की अहमियत कम नहीं कर सकती। अभियोजन के अनुसार पीड़िता का परिवार पड़ोस में जागरण देखने गया था। सुबह करीब चार बजे लौटने पर पीड़िता घर से गायब मिली। पूछताछ में पता चला कि पीड़िता का दूर का रिश्तेदार आरोपी उसे बहला-फुसलाकर ले गया है। वह शादीशुदा और तीन बच्चों का पिता भी है।

कोर्ट ने पाया कि पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी उसे पहले भी ले गया था। दूसरी बार शादी का झांसा देकर फरीदाबाद ले गया। वहां किराये के कमरे में पत्नी बताकर रखा। कोर्ट ने पीड़िता की उम्र के सवाल पर हाईस्कूल प्रमाणपत्र को महत्वपूर्ण माना, जिसके अनुसार घटना के समय उसकी उम्र 16 वर्ष थी। हालांकि, मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जांच में उसकी उम्र 18 वर्ष बताई गई थी। 

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