रिपोर्ट भेजने में आगरा नंबर वन, नसीहत लें दूसरे जिले
कोर्ट ने पाया कि आदेश के अनुपालन में आगरा जिला जज नंबर वन है। कोर्ट ने कहा कि इनसे फिसड्डी जिलों को सीखना चाहिए कि रिपोर्ट कैसे बनाई जाती है। हालांकि, आगरा के अलावा बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या के जिला जजों की रिपोर्ट से कोर्ट पूरी तरह संतुष्ट नजर आई।
प्रयागराज समेत 42 जिलों ने आधी-अधूरी तो 26 ने भेजी ही नहीं रिपोर्ट
कोर्ट ने पाया कि मथुरा, आजमगढ़, उन्नाव और वाराणसी सहित 13 जिलों की रिपोर्ट अधूरी थी। क्योंकि, उन्होंने साल-दर-साल का विवरण नहीं दिया था। वहीं, लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर और प्रयागराज, वाराणसी समेत 29 जिलों ने उन मामलों की संख्या नहीं बताई, जो दशकों से लंबित हैं। रिपोर्ट भेजने में पूरी तरह विफल रहे 26 जिला जजों ने समय बढ़ाने तक की मांग नहीं की।
अधीनस्थों के जरिये भेजी रिपोर्ट से नाराजगी
कोर्ट ने इस पर भी नाराजगी जताई कि उन्नाव, गाजियाबाद और हापुड़ जैसे जिलों ने अपनी रिपोर्ट जिला जज के हस्ताक्षर के बजाय अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से भेजी है। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट जिला जजों से मांगी गई थी, अधीनस्थों से नहीं।
ऐसा लगता है कि अधूरी और रिपोर्ट नहीं भेजने वाले जिले दशकों से लंबित मामलों की जानकारी छिपा रहे हैं। उनकी कार्यशैली कर्तव्य पालन में लापरवाही है या अवमानना, इसका फैसला उचित समय पर लिया जाएगा। - इलाहाबाद हाईकोर्ट