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UP :हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- लंबित आरोप पत्रों की जानकारी देने में जिला अदालतें फिसड्डी, एक हफ्ते की दी मोहलत

Sat, 14 Feb 2026 12:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रदेश की जिला अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों में दशकों तक आरोप तय नहीं होने से नाराज है। कोर्ट ने कहा कि लेटलतीफी करने वाले जिला जजों को आगरा के जिला जज से नसीहत लेनी चाहिए। नाराज कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी है। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रदेश की जिला अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों में दशकों तक आरोप तय नहीं होने से नाराज है। इससे भी ज्यादा उन जिला जजों से खफा है, जिन्होंने दिसंबर में लंबित मामलों की तलब की गई जानकारी आधी-अधूरी दी या फिर अपने अधीनस्थों के जरिये पेश कर खानापूरी की। कोर्ट ने इसे न्यायिक अनुशासनहीनता मानते हुए ऐसे जिला जजों को विस्तृत जानकारी देने के लिए एक हफ्ते की आखिरी मोहलत दी है।

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इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने उन जिला जजों को आगरा के जिला जज से सीख लेने की नसीहत दी है, जिन्हें रिपोर्ट बनाने में दिक्कत महसूस हो रही है। मामले में 27 फरवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट प्रयागराज की याची उर्मिला मिश्रा की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

कहा कि दशकों से आरोप तय न होना न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन है। यह सीधे तौर पर कानून के शासन को प्रभावित करता है। इससे पहले कोर्ट ने 16 दिसंबर को प्रदेश के सभी जिला जजों से रिपोर्ट तलब कर पूछा था कि 2004 से 2024 के बीच ऐसे कितने आरोप पत्र दाखिल हुए हैं, जिनमें अब तक आरोप तय नहीं हो सके।

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रिपोर्ट भेजने में आगरा नंबर वन, नसीहत लें दूसरे जिले

कोर्ट ने पाया कि आदेश के अनुपालन में आगरा जिला जज नंबर वन है। कोर्ट ने कहा कि इनसे फिसड्डी जिलों को सीखना चाहिए कि रिपोर्ट कैसे बनाई जाती है। हालांकि, आगरा के अलावा बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या के जिला जजों की रिपोर्ट से कोर्ट पूरी तरह संतुष्ट नजर आई।

प्रयागराज समेत 42 जिलों ने आधी-अधूरी तो 26 ने भेजी ही नहीं रिपोर्ट

कोर्ट ने पाया कि मथुरा, आजमगढ़, उन्नाव और वाराणसी सहित 13 जिलों की रिपोर्ट अधूरी थी। क्योंकि, उन्होंने साल-दर-साल का विवरण नहीं दिया था। वहीं, लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर और प्रयागराज, वाराणसी समेत 29 जिलों ने उन मामलों की संख्या नहीं बताई, जो दशकों से लंबित हैं। रिपोर्ट भेजने में पूरी तरह विफल रहे 26 जिला जजों ने समय बढ़ाने तक की मांग नहीं की।

 

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अधीनस्थों के जरिये भेजी रिपोर्ट से नाराजगी

कोर्ट ने इस पर भी नाराजगी जताई कि उन्नाव, गाजियाबाद और हापुड़ जैसे जिलों ने अपनी रिपोर्ट जिला जज के हस्ताक्षर के बजाय अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से भेजी है। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट जिला जजों से मांगी गई थी, अधीनस्थों से नहीं।

ऐसा लगता है कि अधूरी और रिपोर्ट नहीं भेजने वाले जिले दशकों से लंबित मामलों की जानकारी छिपा रहे हैं। उनकी कार्यशैली कर्तव्य पालन में लापरवाही है या अवमानना, इसका फैसला उचित समय पर लिया जाएगा। - इलाहाबाद हाईकोर्ट

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