सीआईएस सिस्टम से हो रहे परेशानी को लेकर गत नौ फरवरी को हुई वकीलों की हड़ताल से हाईकोर्ट क्षुब्ध है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने हड़ताल के निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि बार ने सिस्टम से आ रही दिक्कतों के दूर होने तक पूरा सहयोग करने का वादा किया था। इसके बावजूद बिना किसी ठोस कारण के न्यायिक व्यवस्था को पंगु कर दिया गया। पीठ ने उम्मीद जाहिर की है कि भविष्य में बार एसोसिएशन ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे न्यायिक प्रक्रिया पंगु हो जाए।
पीठ ने कहा कि बार अध्यक्ष और वरिष्ठ सदस्यों की जजों की कमेटी से हुई वार्ता में सिस्टम पूरी तरह लागू होने व होली तक सहयोग देने की हामी भरी थी। सभी जजों से प्रतिकूल आदेश न पारित करने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद बिना किसी उचित कारण के अचानक हड़ताल का निर्णय ले लिया गया। मुख्य न्यायाधीश डी बी भोसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने कृषि औद्योगिक विद्यालय की प्रबंध समिति की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ का कहना था कि सिस्टम सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर देश के सभी 24 उच्च न्यायालयों में लागू किया जा रहा है। 11 उच्च न्यायालयों में यह लागू हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नेशनल इफार्मेटिक सेन्टर पुणे ने केस इंफार्मेशन सिस्टम तैयार किया है। इसे 18 जनवरी 2018 से लागू करने की काम चल रहा है । 30 जनवरी को पांच सीनियर वकीलों वीसी मिश्र, एनसी राजवंशी,ओपी सिंह, टीपी सिंह और राधाकान्त ओझा के साथ वार्ता की गई और पूरा सहयोग देने पर सहमति बनी थी। जजों ने सिस्टम फूलप्रूफ होने तक वकीलों से धैर्य धारण रखने की अपील की थी। चीफ जस्टिस के साथ कंप्यूटर कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस दिलीप गुप्ता ने बार एसोसिएशन में आकर सिस्टम के सुधार की जानकारी दी और कहा कि यह सिस्टम बेहतर है ।
उसी दिन एक फरवरी को ही शाम को बार ने प्रस्ताव पारित किया कि केस अदम पैरवी में खारिज होने पर संबंधित कोर्ट का बहिष्कार करेगी। 579 वकीलों की शिकायत पर आठ फरवरी को गवर्निंग काउंसिल की बैठक बुलाई गई और नौ फरवरी को न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर दिया गया। हालांकि जजों की कमेटी ने बार को आश्वस्त किया था कि किसी भी अधिवक्ता को सिस्टम से परेशानी हो रही है तो लिखित रूप से दे उसे ठीक किया जाएगा। मगर ओएसडी कंप्यूटर वीरेन्द्र एस रावत ने बताया कि बार की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। वकीलों को एसएमएस से मुकदमों की सूचना दी जा रही है ।