याची ने जनहित याचिका में मांग की थी कि खसरा नंबर 474 रकबा 0.70 हेक्टेयर खेल के मैदान का अतिक्रमण से खाली कराया जाय। इस पर हाईकोर्ट ने सरकारी वकील से जानकारी मांगी तो एसडीएम गंगिरी छर्रा ने 23 मार्च 2022 को जानकारी दी कि याची का अवैध कब्जा अधिकारियों व गांव वालों की मौजूदगी में उस जमीन से हटाया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खुद सार्वजनिक भूमि का अतिक्रमण करने वाले की खेल का मैदान खाली कराने के लिए दाखिल जनहित याचिका पांच हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने हर्जाना राशि एक माह में जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि हर्जाना राशि जमा नहीं की जाती तो महानिबंधक वसूल कर विधिक सेवा समिति में जमा कराये। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया ने अलीगढ़ की ग्राम पंचायत कैसर के निवासी सतीश चंद्र की जनहित याचिका पर दिया है।
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याची ने जनहित याचिका में मांग की थी कि खसरा नंबर 474 रकबा 0.70 हेक्टेयर खेल के मैदान का अतिक्रमण से खाली कराया जाय। इस पर हाईकोर्ट ने सरकारी वकील से जानकारी मांगी तो एसडीएम गंगिरी छर्रा ने 23 मार्च 2022 को जानकारी दी कि याची का अवैध कब्जा अधिकारियों व गांव वालों की मौजूदगी में उस जमीन से हटाया गया है। यह जानकारी मिलने पर हाई कोर्ट ने कहा कि ये आरोप सही पाये गये तो भारी हर्जाना लगाया जाएगा।
याची अधिवक्ता ने याची से जानकारी लेने के लिए समय मांगा। अगली सुनवाई के दिन याचिका खारिज करने का अनुरोध किया। इस पर हाई कोर्ट ने हर्जाने के साथ याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने हर्जाना राशि एक माह में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि हर्जाना राशि जमा नहीं की जाती तो महानिबंधक वसूल कर विधिक सेवा समिति में जमा कराये।