इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर मुकदमे के दाखिले में विलंब का आधार संतोषजनक हो तो वह सुनवाई योग्य है। उसे मात्र विलंब हो जाने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है। अदालतों को विलंब से दाखिले पर मुकदमों को खारिज करने से पहले उसके आधार को समझना चाहिए। अगर आधार संतोषजनक हो तो वह सुनवाई के योग्य है।
यह फैसला न्यायमूर्ति विपिन कुमार सक्सेना की एकल खंडपीठ ने सुनाया है। कोर्ट प्रवीण गोयल बनाम आगरा ऑयल एंड जनरल इंडस्ट्रीज लिमिटेड व अन्य के मामले में सुनवाई कर रही थी। याची के अधिवक्ता सुदीप हरकौली ने तर्क दिया कि याची के खिलाफ 20 लाख रुपये के लेनदेन के मामले में जिला न्यायालय आगरा की ओर से एकतरफा फैसला सुना दिया गया था। मामले में याची ने जिला न्यायालय में अपील दायर की थी।
तकनीकी खामी से याचिका वापस ले ली। उसके बाद याची ने फिर से याचिका दाखिल की तो उसकी याचना को जिला न्यायालय ने स्वीकार कर याची केखिलाफ दिए गए फैसले पर रोक लगा दी। जिला न्यायालय की अपीलीय आदेश केखिलाफ विरोधी पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत केफैसले पर रोक लगाने की मांग की।
विपक्षी का तर्क था कि याची ने पहली बार दाखिल की गई याचिका वापस ले ली थी। कोर्ट ने याची को पुन: याचिका दायर करने की छूट नहीं दी थी। इसकेबावजूद याचिका स्वीकार कर जिला न्यायालय ने अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी। लेकिन कोर्ट ने विपक्षीगण केअधिवक्ता के तर्क को स्वीकार नहीं किया और मामले में संतोषजनक उत्तर मिलने केबाद यह फैसला सुनाया।